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स्टोरीबोर्डिंग की शुरुआत कैसे करें।
किसी फ़िल्म के रिलीज़ होने से पहले, स्क्रिप्ट को जीवंत बनाने की ज़िम्मेदारी स्टोरीबोर्ड आर्टिस्ट की होती है। इस सफ़र में आप जानेंगे कि स्टोरीबोर्ड को क्रिएटिव तरीके से कैसे तैयार किया जाता है और कौन-से कैमरा शॉट्स कहानी बताने में सबसे असरदार हैं। साथ ही, आप यह भी जान पाएँगे कि प्री-प्रोडक्शन की दुनिया में करियर की नींव कैसे रखी जा सकती है।
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स्टोरीबोर्ड क्या है?
स्टोरीबोर्ड ड्रॉइंग्स कि एक ऐसी सीरिज़ है, जो किसी स्क्रिप्ट या स्क्रीनप्ले की कहानी को विज़ुअल रूप में पेश करती है। डिटेल्ड ड्रॉइंग्स से लेकर साधारण स्टिक फ़िगर्स तक, स्टोरीबोर्ड किसी भी रूप में बने, उसकी असली ताकत यही है कि वह प्रोडक्शन टीम को कहानी को समझने और निभाने की राह दिखाता है। Archer और Black Lightning के स्टोरीबोर्ड आर्टिस्ट केविन मेलन कहते हैं, “कुछ स्टोरीबोर्ड्स बहुत साधारण होते हैं। लेकिन जब तक स्टोरीबोर्ड जानकारी और भावनाएँ सही तरह से पहुँचा रहा है, तब तक कोई फ़र्क नहीं पड़ता।”
एक अच्छा स्टोरीबोर्ड कहानी को जीवंत बना देता है।
स्टोरीबोर्ड्स एक स्क्रिप्ट का विज़ुअल रूप होते हैं और कहानी को स्क्रीन पर जीवंत बनाने की पहली कड़ी हैं। Disney के रंग-बिरंगे कार्टून से लेकर दमदार लाइव-एक्शन फ़िल्मों तक, हर जगह प्री-विज़ुअलाइज़ेशन के प्रोसेस में इनकी भूमिका बेहद अहम है। मेलन बताते हैं “स्टोरीबोर्ड्स एक गाइड की तरह होते हैं, जिनकी मदद से डायरेक्टर अपने आइडिया को सेट पर मौजूद सैकड़ों लोगों तक पहुँचा पाता है।”
स्टोरीबोर्ड्स बनाने वाले आर्टिस्ट का काम केवल आदेश मानना नहीं, बल्कि कहानियाँ गढ़ना है। उसे सबसे पहले एक कहानीकार होना चाहिए और हर सीन को शॉट-बाय-शॉट दिलचस्प और रोचक बनाने के क्रिएटिव तरीके ढूँढने चाहिए, साथ ही सभी ज़रूरी जानकारी का ध्यान रखना चाहिए। मेलन कहते हैं, “स्टोरीबोर्ड्स बनाते समय हमेशा पहले कुछ डायनेमिक या रोचक चीज़ ही करें। फिर हम “जेंगा” खेल की तरह यह देखना शुरू करते हैं कि क्या संभव है और जो शॉट्स बहुत मुश्किल हैं, उन्हें हटा देते हैं। अगर किसी सीन में ऐसे स्पेशल इफ़ेक्ट्स सुझाए गए हैं जो वीडियो प्रोडक्शन के बजट से बाहर हैं, तो उन्हें बाद में हटाया जा सकता है। लेकिन स्टोरीबोर्ड्स में हमेशा वही शामिल करें जो कहानी को सबसे रोमांचक बनाता है। ध्यान रखें, हर मीडियम में स्टोरीबोर्ड बनाने का तरीका अलग हो सकता है। उदाहरण के लिए, एनिमेशन स्टोरीबोर्ड्स, लाइव-एक्शन से अलग होते हैं क्योंकि वे अक्सर बहुत साधारण विज़ुअल आउटलाइन से शुरू होते हैं, जिन्हें बाद में लेखक और कलाकार मिलकर पूरी कहानी के अनुसार तैयार करते हैं।
स्टोरीबोर्ड बनाने की कला: हर शॉट को जोड़कर कहानी को जीवंत बनाना।
Archer के आर्ट डायरेक्टर नील होलमैन कहते हैं, “स्टोरीबोर्ड बनाने का मतलब सिर्फ़ कहानी सुनाना नहीं है, बल्कि उसे स्क्रीन पर जीवंत बनाने का तरीका है।” आप सोचना शुरू करते हैं कि अलग-अलग पलों में कौन-से शॉट्स इस्तेमाल हों, ताकि टोन और कैरेक्टर को और प्रभावशाली बनाया जा सके। स्टोरीबोर्ड आर्टिस्ट अलग-अलग कैमरा एंगल्स और शॉट्स का इस्तेमाल करके सीन में एक्शन, ड्रामा और भावनाएँ है। डायरेक्टर, स्टोरीबोर्ड्स में दिए गए सीन और शॉट्स से अपनी शॉट लिस्ट बनाना शुरू कर देंगे। सीन का बैकग्राउंड सेट करने के लिए एस्टैब्लिशिंग शॉट का इस्तेमाल किया जा सकता है, एक्सट्रीम क्लोज़-अप भावनाओं को गहराई देता है, और अलग-अलग कैरेक्टर्स की फ़्रेमिंग उनके रिश्तों को बेहतर तरीके से पेश करती है। ये सभी क्रिएटिव फ़ैसले सबसे पहले स्टोरीबोर्ड आर्टिस्ट ही लेता है।
प्रोफ़ेशनल स्टोरीबोर्ड आर्टिस्ट इसी तरह से काम करते हैं, लेकिन यह समझने के लिए कि कौन-से शॉट्स एक-दूसरे के साथ सबसे अच्छे लगते हैं, आपको क्या करना चाहिए? रिसर्च और अध्ययन से आप यह जान सकेंगे कि किसी खास सीक्वेंस में कौन-से शॉट्स अच्छे लगते हैं। फ़िल्म थ्योरी पढ़कर आप यह जान पाएँगे कि कौन-से शॉट्स किन सीक्वेंस में बेहतर होते हैं। फिर बस कुछ ही तरह के शॉट्स से शुरुआत करके धीरे-धीरे अभ्यास करें।
तीन तरह के शॉट्स से अपनी स्किल्स को निखारना।
बेसिक स्टोरीबोर्डिंग को तीन तरह के शॉट्स में बाँटा जा सकता है: एक सिंगल जो एक व्यक्ति पर फ़ोकस करता है, ओवर-द-शोल्डर शॉट जिसमें एक कैरेक्टर के पीछे से दूसरे कैरेक्टर को दिखाया जाता है और टू-शॉट जिसमें दोनों कैरेक्टर की बातचीत को कैप्चर किया जाता है। मेलन कहते हैं, "इन शॉट्स के बीच आसानी से स्विच किया जा सकता है और ये शॉट्स मुश्किल नहीं हैं। कहानी कहने की कला तब सामने आती है जब आप तय करते हैं कि इन शॉट्स को किस सीक्वेंस में रखना है और कब ज़ूम इन या ज़ूम आउट करना है, ताकि भावनाओं को महसूस कराया जा सके। असल चुनौती यह है कि इन तीन शॉट्स की बेसिक लैंग्वेज को अपनाकर आप उसमें अपना अलग अंदाज़ कैसे जोड़ते हैं?
आपका पहला स्टोरीबोर्ड एक लर्निंग एक्सपीरियंस होगा जिसमें आप जानेंगे कि क्या काम करता है और क्या नहीं। बेसिक्स को समझने के बाद, प्रैक्टिस से अपनी स्टोरीबोर्डिंग स्किल्स को निखारा जा सकता है और नए आइडियाज़ पर काम किया जा सकता है। होलमैन सुझाव देते हैं, “ऐसा कोई स्क्रीनप्ले चुनें जिसे आपने पहले कभी न देखा हो और उसका स्टोरीबोर्ड बनाएँ। एक सीन पूरा करने के बाद उसमें बदलाव करके देखें और फिर देखें कि प्रोफ़ेशनल्स ने उसे कैसे बनाया है, यह बहुत दिलचस्प तुलना है। इस तरह खुद जाना जा सकता है कि प्रोफ़ेशनल्स कैसे काम करते हैं और कैसे सोचते हैं।"
विज्ञापन स्टोरीबोर्ड्स।
पुरस्कार विजेता एनिमेटर और फ़िल्म निर्माता क्रिस डूली के लाइव-एक्शन और एनिमेशन प्रोजेक्ट्स पर एक नज़र डालें।
स्टोरीबोर्डिंग में करियर बनाना।
चाहे आपका लक्ष्य एनिमेटर बनना हो, लाइव-एक्शन फ़ीचर फ़िल्मों में काम करना हो, या ओपनिंग क्रेडिट्स, म्यूज़िक वीडियोज़, या वीडियो मार्केटिंग के लिए स्टोरीबोर्ड्स बनाना हो, अपने काम का पोर्टफ़ोलियो तैयार करना बेहद ज़रूरी है। होलमैन कहते हैं, "मैं यह बार-बार सुनता हूँ। मैं वाकई स्टोरीबोर्ड्स बनाना चाहता हूँ। क्या मैं आपके कुछ स्टोरीबोर्ड्स देख सकता हूँ? मैंने कभी नहीं बनाए। अगर आप बोर्ड्स बनाना चाहते हैं, तो बोर्ड्स बनाना शुरू करें।"
अपने पसंदीदा काम का अध्ययन कर लेने के बाद खुद काम करना शुरू करें और उसे अपने पोर्टफ़ोलियो में जोड़ें। फिर उन प्रोजेक्ट्स के फ़िल्म क्रेडिट्स देखें जिन पर आप काम करना चाहते हैं और उन लोगों के साथ कनेक्शन बनाएँ जिन्हें आप अपना काम दिखाना चाहते हैं। होलमैन कहते हैं, अगर आप मुझे एक्शन शो और Bob’s Burgers जैसी कॉमिक शैली दोनों दिखा सकें, तो मैं आपसे और भी ज़्यादा प्रभावित हो जाऊँगा। कॉमिक बुक्स ड्रॉ करने वाले लोगों को बेहतरीन एनाटॉमी बनाने और फ़्रेम की कंपोज़िशन पर फ़ोकस करने की आदत होती है, इसलिए वे शानदार स्टोरीबोर्ड आर्टिस्ट बन सकते हैं।"
“अगर आप बोर्ड्स बनाना चाहते हैं, तो बोर्ड्स बनाना शुरू करें।”