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फ़िल्म में स्टैब्लिशिंग शॉट्स इस्तेमाल करने के बारे में जानें।

स्टैब्लिशिंग शॉट्स, नए सीन की शुरुआत करते हैं और दर्शकों को बताते हैं कि घटना कहाँ और कब हो रही है। ये किसी किरदार का नज़रिया दिखाने या उसके कैरेक्टर डेवलपमेंट में भी मदद कर सकते हैं।

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स्टैब्लिशिंग शॉट क्या होता है?

स्टैब्लिशिंग शॉट्स आमतौर पर वाइड या एक्सट्रीम वाइड शॉट्स होते हैं, जिनमें इमारतें या लैंडस्केप दिखाए जाते हैं। इनमें साइनबोर्ड्स, मशहूर जगहें (लैंडमार्क्स) या ऐसी चीज़ें शामिल हो सकती हैं, जो समय और जगह की जानकारी साफ़ तौर पर देती हैं। ये शॉट्स दर्शकों को यह यकीन दिलाने में मदद करते हैं कि आपकी फ़िल्म का सीन पेरिस के किसी कैफ़े में हो रहा है या लंदन के मेट्रो में, न कि मुंबई की फ़िल्म सिटी में।

अपने दर्शकों को कॉन्टेक्स्ट दें।

ज़रूरी नहीं है कि स्टैब्लिशिंग शॉट आपकी फ़िल्म का सबसे अच्छा शॉट हो। ग्राफ़िक डिज़ाइनर और इंडिपेंडेंट फ़िल्म प्रोड्यूसर निक एस्कोबार कहते हैं, “हॉलीवुड में सबसे आसान तरीका है गोल्डन गेट ब्रिज का हेलीकॉप्टर शॉट दिखाना। इससे लोग समझ जाते हैं, ‘ओह, हम सैन फ़्रांसिस्को में हैं।’ यह बताता है कि आप कहाँ हैं, क्या हो रहा है, शहर को कैसे दिखाया या कलर-ग्रेड किया गया है, और कौन से दौर की बात हो रही है।”

ड्रोन्स की मदद से एरियल शॉट्स लेकर स्टैब्लिशिंग सीन बनाना ज़्यादा आसान हो जाता है।

फ़िल्म इतिहास के सबसे यादगार स्टैब्लिशिंग शॉट सीक्वेंसेज़ में से एक स्टैनली क्यूब्रिक की हॉरर फ़िल्म द शाइनिंग की शुरुआत में देखने को मिलता है। कैमरा जंगलों और पहाड़ों के ऊपर से बड़े आराम से उड़ता हुआ जाता है और आखिर में उस पहाड़ी होटल को दिखाता है, जहाँ फ़िल्म की कहानी आधारित है। जब यह फ़िल्म बनाई गई थी, उस समय ऐसे शॉट्स लेने के लिए हेलीकॉप्टर और बड़ी टीम की ज़रूरत होती थी। यानी, ऐसे शॉट सिर्फ़ बड़े बजट वाली फ़िल्मों में ही हो सकते थे। लेकिन आज ड्रोन्स की वजह से ऐसे शॉट्स कम खर्च में भी लिए जा सकते हैं।

ड्रोन से संबंधित इन दो बातों का ध्यान रखें:

लेखक और फ़िल्ममेकर डेविड एंड्रयू स्टोलर कहते हैं कि “जब भी कैमरा मूव करता है, तो वह दर्शकों को एक खास निगाह से चीज़ों को दिखाता है। अगर आपका स्टैब्लिशिंग शॉट मूव हो रहा है, तो सवाल उठता है कि ‘इसे कौन देख रहा है? मैं किसके पॉइंट ऑफ़ व्यू से यह देख रहा हूँ?’” वहीं डायरेक्टर और ऑथर वैन जेनसन कहते हैं, “आपको ऐसा कुछ शूट करना चाहिए, जहाँ आपको आवाज़ रेकॉर्ड करने की ज़रूरत न हो, क्योंकि ड्रोन्स बहुत ज़्यादा शोर करते हैं।”

अरसे से इस्तेमाल होते आ रहे वाइड शॉट्स से हटकर कुछ नया करें।

आपको हमेशा न्यूयॉर्क सिटी की स्काईलाइन जैसे बड़े और शानदार नज़ारे दिखाने की ज़रूरत नहीं होती। सेट डिज़ाइन और प्रॉप्स की मदद से भी दर्शकों को सीन के लिए तैयार किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, एक थेरेपिस्ट के ऑफ़िस में दीवार पर डिप्लोमा लगे हो सकते हैं और एक सोफ़ा हो सकता है, जिसके पास एक कुर्सी रखी हो। ये छोटी-छोटी चीज़ें ही दर्शकों को तुरंत बता देती हैं कि वे कहाँ हैं और उन्हें क्या समझने की ज़रूरत है।

जेनसन एक म्यूज़िक वीडियो बनाने का अनुभव बताते हैं, जिसकी कहानी एक हाउस पार्टी में होती है। वे कहते हैं, “ओपनिंग शॉट में हमने बीयर को ग्लास में डालने का एक क्लोज़-अप दिखाया। मेरे लिए यह एक स्टैब्लिशिंग था, भले ही यह आम तौर पर इस्तेमाल होने वाले स्टैब्लिशिंग शॉट जैसा नहीं था।”

इन ट्रांज़िशन शॉट्स में भी अपनी क्रिएटिविटी दिखाने की पूरी गुंजाइश होती है। अलग-अलग फ़्रेमिंग्स, कैमरा पोज़िशन्स, लो-ऐंगल्स या हाई-ऐंगल्स आज़माकर देखे जा सकते हैं और सिर्फ़ जानकारी देने वाले शॉट के बजाय एक खूबसूरत शॉट बनाया जा सकता है।

स्टैब्लिशिंग शॉट्स से बेहतरीन नतीजे पाने के लिए अन्य सुझाव।

एक पुरानी, ढहती हुई इमारत का स्टैब्लिशिंग शॉट।

कहानी पर फ़ोकस करें।

कभी मत भूलें कि आप एक कहानीकार हैं, और हर शॉट आपकी कहानी को आगे बढ़ाने के लिए होना चाहिए। स्टोलर कहते हैं कि “लॉ एंड ऑर्डर की तरह, अगर आप तेज़ी से अलग-अलग लोकेशन्स पर जा रहे हैं, तो स्टैब्लिशिंग शॉट्स इस्तेमाल करना मददगार होता है। लेकिन अगर आपको कुछ छोटा बनाना है, तो उस जानकारी को और जल्दी सेट अप किया जा सकता है।”

जगह को ध्यान में रखें।

अपनी लोकेशन को ध्यान में रखते हुए ही कहानी को गढ़ें। जेनसन कहते हैं, “उस जगह को एक्सप्लोर करके ऐसे ऐंगल्स सेट करें कि उसमें से सबसे खूबसूरत शॉट्स निकलकर आएँ।” अगर आपको वाइड या लॉन्ग शॉट लेना है, तो पक्का करें कि आपके पास उसके लिए ज़रूरी जगह उपलब्ध हो। स्टोलर कहते हैं, “शुरुआत करने वाले लोग अक्सर बहुत फ़्लैट शूट करते हैं, यानी बैकग्राउंड में ज़्यादा कुछ नहीं दिखाते। इसलिए कैमरे को बहुत पास न लेकर जाएँ। आपको थोड़ा पीछे हटकर शूट करना चाहिए, ताकि शॉट में अच्छी डेप्थ दिखे।”

एक छोटी झील के दूसरे छोर पर बसे एक छोटे से गाँव का सीन।
एक जेटी पर खड़ी लड़की का हवाई शॉट, जिसमें वह अकेली खड़ी है और पानी से घिरी हुई है।

अलग-अलग चीज़ें आज़माकर देखें।

वाइड, मीडियम, और क्लोज़-अप शॉट्स जरूर लें, लेकिन बाकी संभावनाओं के लिए भी तैयार रहें। डॉक्यूमेंट्री फ़िल्ममेकर और एडिटर डॉमिनिक डुशेनो कहते हैं कि “एडिटिंग रूम में आपके पास कई एक्स्ट्रा फ़ुटेजेज़ होनी चाहिए। एडिटर कहानी को डायरेक्टर या सिनेमैटोग्राफ़र के मुकाबले अलग निगाह से देख सकता है, इसलिए अगर आप लोकेशन पर हैं और आपके पास समय है, तो ऐसे शॉट्स लेने की कोशिश करें जो कहानी को और बेहतर बना सकें।” Adobe {{premiere}} में आपके पास हमेशा अलग-अलग स्टैब्लिशिंग शॉट की मदद से एक रफ़ कट बनाने का विकल्प होता है।

देखकर सीखें।

जो फ़िल्में आपको पसंद हैं, उन्हें ध्यान से देखें, खासकर हर सीन की शुरुआत में आने वाले शॉट्स पर ध्यान दें। उन शॉट्स को खोजें, जो आपको अच्छे लगें, फिर उसी आइडिया में अपनी स्टाइल जोड़कर देखें। याद रखें, इन शॉट्स का मकसद सिर्फ़ यह बताना नहीं है कि हम कहाँ हैं, बल्कि ये किसी किरदार की कहानी दिखाने, किरदारों के बीच रिश्ते दिखाने, और सीन का मूड बनाने में भी मदद करते हैं।

लाइटिंग का इस्तेमाल करके तय करें कि दर्शक की नज़र शॉट में कहाँ पर होनी चाहिए।

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