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लॉन्ग शॉट लें: अपनी फ़िल्म को स्टेब्लिश और फ़्रेम करने के लिए लॉन्ग शॉट्स का इस्तेमाल करें।

लॉन्ग शॉट में कैमरे को दूर रखकर शॉट लिया जाता है, जिससे दर्शकों को जगह और माहौल का सटीक एहसास हो। जानें कि इस तरह की सिनेमैटोग्राफ़ी का इस्तेमाल करके अपने दर्शकों का ध्यान कैसे खींचा जाए।

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लॉन्ग शॉट क्या होता है?

  • लॉन्ग शॉट, जिसे कभी-कभी वाइड या फ़ुल शॉट भी कहा जाता है, सिनेमैटोग्राफ़र के टूलबॉक्स में मौजूद सबसे ज़रूरी कैमरा शॉट्स में शामिल होता है।
  • लॉन्ग शॉट आपके दर्शकों को महसूस कराते हैं कि वे भी सीन का हिस्सा हैं। इस कैमरा एंगल को समझना एक फ़िल्ममेकर के रूप में आपकी कामयाबी के लिए बहुत ज़रूरी है।
  • यह शॉट लेने के लिए, आपको महँगा इक्विपमेंट लेने की ज़रूरत नहीं है। हालाँकि, सही कैमरा लेंस और शॉट लिस्ट से आपको मदद मिल सकती है।

लॉन्ग शॉट्स अपने नाम पर खरे उतरते हैं।

लॉन्ग शॉट को “बिग पिक्चर शॉट” के रूप में देखा जा सकता है। इस तरह की फ़्रेमिंग का काम होता है दर्शकों को फ़िल्म में आपके हाथों तैयार की गई दुनिया में ले जाना। क्लोज़-अप या मीडियम शॉट्स के उलट, यह सीन में सारी चीज़ें दिखाता है।

शुरुआत में, फ़ीचर फ़िल्मों में लॉन्ग शॉट्स का इस्तेमाल किया जाता था, क्योंकि ये थिएटर में पर्दा उठने जैसा अहसास देते थे। दर्शक पूरी जगह देख लेते हैं और समझ जाते हैं कि कहानी किस दिशा में जा रही है। वीडियोग्राफ़र लिसा बोल्डेन कहती हैं, “लॉन्ग शॉट आपको अपनी स्टाइल दिखाने का मौका देता है, जैसे कि कॉस्ट्यूम, सेट, सिनेमैटोग्राफ़ी, कैमरा ऐंगल। ये आपको फ़िल्ममेकर के तौर पर अपनी छाप छोड़ने में मदद करता है।”

कुछ लॉन्ग शॉट्स, स्टैब्लिशिंग शॉट्स होते हैं, यानी किसी नए सीन या हिस्से की शुरुआत दिखाने वाले। हालाँकि, हर लॉन्ग शॉट एक स्टैब्लिशिंग शॉट हो, ऐसा ज़रूरी नहीं है। लॉन्ग शॉट एक एहसास भी पैदा कर सकते हैं, जैसे कि पीटर जैक्सन की लॉर्ड ऑफ़ द रिंग्स फिल्मों में, जहाँ किरदारों को मैदानों और पहाड़ों पर दौड़ते हुए दूर से दिखाया जाता है, जिससे दर्शकों को समझ में आता है कि उन्हें कितना लंबा और कितना मुश्किल सफ़र तय करना है। डायरेक्टर एलिशा जे. रोज़ कहती हैं, “आमतौर पर इसका इस्तेमाल सीन की शुरुआत में किया जाता है, लेकिन इसे कन्टिन्युटी की दिक्कतें या सीन में हो रही उलझन को साफ़ करने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है।”

लॉन्ग शॉट का मकसद दर्शकों को सही संदर्भ देना होता है, ताकि वे आपकी बनाई फ़िल्म को पूरी तरह से महसूस कर सकें। यहाँ बताया गया है कि एक अच्छा लॉन्ग शॉट कैसे लिया जा सकता है।

एक बेहतर क्वालिटी के लॉन्ग शॉट में क्या चीज़ें शामिल होती हैं?

एक असरदार लॉन्ग शॉट आपके दर्शकों को आपकी फ़िल्म में गाइड करता है। इन तरीकों को अपनाकर, एक सामान्य शॉट को और भी खास बनाया जा सकता है।

1. लाइटिंग

फ़िल्म और फोटोग्राफ़ी की दुनिया में, लाइटिंग ही पूरे प्रॉजेक्ट की नींव होती है। लॉन्ग शॉट्स अक्सर बाहर लिए जाते हैं, जहाँ सूरज की रोशनी, लाइटिंग के लिए पर्याप्त होती है। ध्यान रखें कि चाहे कहीं भी शूट किया जा रहा हो, लाइटिंग ही सीन का मूड तय करती है।

2. फ़्रेमिंग, सब्जेक्ट, और कम्पोज़िशन।

फ़िल्म का फ़्रेम एक खिड़की की तरह होता है, जो उसके अंदर की दुनिया दिखाता है। सोचिए, अगर कोई दर्शक खिड़की से सड़क की तरफ़ देख रहा हो, तो उसे क्या दिखाई देगा? वह क्या खोजेगा? एक असरदार इमेज बनाने के लिए सोचना ज़रूरी है कि फ़्रेम में कौन-कौन से सब्जेक्ट्स होंगे और वे एक-दूसरे और कैमरे के मुकाबले कहाँ होंगे। क्या आपको आई-लेवल, लो-ऐंगल शॉट या फिर बर्ड्स-आई व्यू शॉट लेना है? आपके लॉन्ग शॉट से तय होता है कि दर्शक क्या देखने वाले हैं। साथ ही, यह शॉट आपको दर्शकों की उम्मीदों के साथ खेलने, उन्हें चौंकाने या उनके नज़रिए को सही ठहराने जैसे काम करने की सहूलियत देता है। बोल्डेन कहती हैं, “लॉन्ग शॉट दर्शकों को संदर्भ देता है और ऐसे हिंट्स देता है जिससे उन्हें पता चलता है कि वे कहाँ हैं।”

3. फ़ोकस।

आपके लॉन्ग शॉट में क्या फ़ोकस में होगा और क्या आउट ऑफ़ फ़ोकस, यह एक बहुत अहम फै़सला होता है। अगर आपको सब कुछ साफ़-साफ़ दिखाना है, तो आपको ज़्यादा डेप्थ ऑफ़ फ़ील्ड वाला लेंस इस्तेमाल करना चाहिए या आपको फ़ोकस रैक का इस्तेमाल करना चाहिए, ताकि दर्शकों का ध्यान किसी खास जगह पर ले जाया जा सके। अब आपके लिए क्या सही है, यह आपके विशन और आपकी ज़रूरतों से तय होता है।

4. मूवमेंट।

लॉन्ग शॉट में दो तरह के मूवमेंट्स होते हैं। पहला, कैमरे का मूवमेंट और दूसरा, फ़्रेम के अंदर होने वाला मूवमेंट। दोनों के लिए पहले से प्लान तैयार करना और उन्हें अपनी शूटिंग स्क्रिप्ट में लिखना ज़रूरी होता है। इससे आपको पता रहेगा कि किस समय क्या करना है, खासकर जब आपको कोई लॉन्ग टेक शूट करने हो।

लॉन्ग शॉट के लिए आइडिया।

अगर आपको लॉन्ग शॉट्स बनाने के लिए आइडिया चाहिए, तो इसके लिए सैकड़ों नहीं बल्कि हज़ारों फ़िल्में देखी जा सकती हैं। आम तौर पर, ज़ॉनरा के हिसाब से फ़िल्मों को समझने से भी मदद मिलती है। यहाँ कुछ डायरेक्टर्स के उदाहरण दिए गए हैं, जो लॉन्ग शॉट का बखूबी इस्तेमाल करते हैं।

  • वेस्टर्न फ़िल्में। सर्जियो लियोन, क्लिंट ईस्टवुड और जॉन फ़ोर्ड जैसे डायरेक्टर्स के काम में लॉन्ग शॉट्स के कई दिलचस्प उदाहरण देखे जा सकते हैं। अनफ़र्गिवन में ईस्टवुड के कैरेक्टर का इंट्रोडक्शन सीन देखें या स्टेजकोच में मौजूद ढेर सारे लॉन्ग शॉट्स देखें।
  • ऐक्शन फ़िल्में। अगर आपको शानदार लॉन्ग शॉट्स देखने हैं, तो मिशन इम्पॉसिबल सीरीज़ से बेहतर कुछ नहीं। घोस्ट प्रोटोकॉल में, बुर्ज खलीफ़ा के आसपास शूट किए गए सीन्स में दर्शाया गया है कि किरदार (और ऐक्टर्स) जो स्टंट्स करने वाले हैं, उनका स्कोप क्या है और उनमें जोखिम कितना है।
  • पीरियड ड्रामा। ऐसी फ़िल्में जो दर्शकों को किसी अलग समय या इतिहास के किसी दौर में ले जाती हैं, उनमें लॉन्ग शॉट्स बहुत ज़रूरी होते हैं। इसकी वजह ये है कि इनकी मदद से उन जगहों का माहौल दिखाया जाता है जिनसे दर्शक बिलकुल अनजान हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, असली कोलोसियम के माहौल को शायद ही किसी ने देखा हो, लेकिन रिडली स्कॉट की ग्लैडिएटर की वजह से आज लोगों के मन में उसकी एक तस्वीर है।
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अपना शॉट शूट करना।

अब आपको समझ आ गया है कि एक बेहतरीन लॉन्ग शॉट में क्या-क्या होता है, तो अगला चरण है इक्विपमेंट। लोकेशन के हिसाब से (जो अक्सर आउटडोर होती है) आपको पक्का करना होगा कि आपके पास वाइड-ऐंगल लेंस या ऐसा ज़ूम लेंस हो जो वाइड-ऐंगल कवर सके। 23mm से 70mm फ़ोकल लेंथ वाले लेंस से शुरुआत करना अच्छा विकल्प है। 16mm लेंस का भी इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन उससे इमेज में थोड़ा “फ़िश-आई” इफ़ेक्ट आ सकता है, जो आपकी सीन की ज़रूरत के हिसाब से अच्छा भी लग सकता है। रोज़ कहती हैं कि “कभी-कभी वाइड लेंस से इमेज में मूवमेंट कम महसूस होता है और कई सीन्स में यह बहुत अच्छा काम करता है।”

वाइड-ऐंगल लेंस पूरे सीन (कभी-कभी पूरी फ़िल्म) का टोन सेट कर सकता है, इसलिए ध्यान रखें कि आप एक अच्छा लेंस चुनें। अपना समय लें और ज़रूरत से थोड़ी ज़्यादा फ़ुटेजेज़ भी शूट करें, ताकि आपके पास एडिट के दौरान विकल्प मौजूद रहें। साथ ही, शॉट को स्मूथ और स्टेबल रखने के लिए, कैमरा मूवमेंट के हिसाब से आपको डॉली रेल्स या स्टेडीकैम का इस्तेमाल करना पड़ सकता है।

अपने लॉन्ग शॉट्स को एडिट करने पर ध्यान दें।

जब आपकी फ़िल्म शूट होकर तैयार हो जाए (चाहे कैन में हो या SD कार्ड में), तब बारी आती है एडिटिंग की। Adobe {{premiere}} आपको फ़्रेम-टू-फ़्रेम एडिटिंग करने के टूल्स उपलब्ध कराता है, ताकि आपके लॉन्ग शॉट्स में एक सेकंड भी ज़्यादा या कम न हो। बेहतरीन और दमदार एडिटिंग टूल्स के साथ-साथ, आपको दर्ज़नों ट्यूटोरियल्स भी मिलते हैं, जो आपको फ़िल्ममेकिंग के हर पहलू को सीखने और अपने सीन को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। परफे़क्ट लॉन्ग शॉट के बारे में अब आपको पता चल गया है, इसलिए जानें कि फ़िल्ममेकिंग के अन्य शानदार शॉट्स कैसे तैयार किए जाते हैं

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