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वाइड शॉट क्या होता है?

जानें कि वाइड शॉट कैसे किसी लोकेशन को साफ़तौर पर दिखाता है और एक अहम सीन के लिए मंच तैयार करता है।

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पैड्रिक ऑमेरा के द्वारा ली गई इमेज

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फ़िल्म बनाना यानी परदे पर एक नई दुनिया रचना।

फ़िल्ममेकर्स अपनी कहानियाँ सुनाने के लिए अलग-अलग कैमरा शॉट्स का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन वाइड शॉट दर्शकों को एक नए सीन में ले जाने के लिए सबसे अहम शॉट्स में से एक है। इसे एस्टैब्लिशिंग शॉट, लॉन्ग शॉट, फ़ुल शॉट या एक्सट्रीम वाइड शॉट (EWS) के नाम से भी जाना जाता है।

इंडिपेंडेंट फ़िल्ममेकर निक एस्कोबार का कहना है, "एस्टैब्लिशिंग शॉट आपको समय और जगह के बारे में बताता है। यह कभी-कभी एक पल की जानकारी भी देता है, लेकिन इसका मुख्य काम दर्शक को सीन से जोड़ना होता है।"

वाइड शॉट का इस्तेमाल कब करें।

एस्कोबार कहते हैं, "वाइड शॉट फ़िल्म का कोई भी ऐसा शॉट होता है जिसे 35mm लेंस या उससे वाइड लेंस से फ़िल्माया जाता है। ज़्यादातर एस्टैब्लिशिंग शॉट्स, वाइड शॉट्स होते हैं। उदाहरण के लिए, ये शॉट्स आपको किसी शहर का बाहरी हिस्सा दिखाते हैं, ताकि आप जान सकें कि अगले सीन्स उसी शहर में हो रहे हैं या ये कोई अपार्टमेंट बिल्डिंग दिखाते हैं, ताकि आप जान सकें कि ठीक इसके बाद वाला सीन उस बिल्डिंग के अंदर होगा।"

वाइड-ऐंगल लेंस का एक अन्य इस्तेमाल पूरे सीन को एक ही शॉट में कैद करना है, जिसे मास्टर शॉट कहते हैं। मास्टर शॉट अक्सर किसी सीन की शुरुआत में लिया जाता है, ताकि दर्शकों को पता चल जाए कि किरदार एक-दूसरे से कितनी दूरी पर और कहाँ खड़े हैं। इसके बाद, बारी-बारी से इंटरैक्ट कर रहे आर्टिस्ट्स के ओवर-द-शोल्डर शॉट्स, क्लोज़-अप शॉट्स, और मीडियम शॉट्स लिए जाते हैं।

शॉट्स की यह अदला-बदली किरदारों के चेहरे के भाव दिखाकर दर्शकों को उनसे जोड़ती है, लेकिन सीन की नींव रखने के लिए मास्टर शॉट ज़रूरी है। पोस्ट-प्रॉडक्शन के दौरान, एडिटर के लिए एक ऐसा शॉट होना भी फ़ायदेमंद होता है जिस पर वे वापस लौट सकें। यह एडिटिंग की लय बनाए रखने में मदद करता है, ताकि दर्शक बार-बार वही दो शॉट्स देखकर बोर न हों।

वाइड शॉट्स सीन का मूड तय कर सकते हैं।

वाइड शॉट्स में दर्शकों को सिर्फ़ सीन और किरदारों के आसपास की जगह के बारे में बताने के लिए ही नहीं, बल्कि किरदारों के भावों को दर्शाने या मूवी की थीम ज़ाहिर करने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है। 'लॉरेंस ऑफ़ अरेबिया' में रेगिस्तान के एक्सट्रीम लॉन्ग शॉट्स फ़िल्म की शानदार कहानी से मेल खाते हैं। इसी तरह, वेस्टर्न फ़िल्में भी अक्सर सीन सेट करने के लिए, वाइड शॉट्स का इस्तेमाल करती हैं।

एस्कोबार समझाते हैं, "फ़िल्म 'द हेटफ़ुल एट' यह काम बहुत अच्छी तरह से करती है। पश्चिमी अमेरिका के उस इलाके के वाइड शॉट्स देखकर महसूस किया जा सकता है कि वहाँ कितनी ठंड है। वहाँ कुछ भी नहीं है और कोई भी नहीं है। आप अलग-थलग हैं और आपके साथ कोई नहीं है। आपको उन किरदारों के लिए बुरा लगता है, जिन्हें वहाँ फँसे बिना किसी इंसानी बस्ती तक पहुँचने की ज़रूरत है।"

भले ही वेस्टर्न फ़िल्मों को पसंद करने वाले दर्शक इन फ़िल्मों में वाइड शॉट्स के इस्तेमाल को पहचानते हैं, लेकिन मज़ेदार बात यह है कि वेस्टर्न शैली की फ़िल्मों में एक जाना-माना ऐंगल, जिसे 'काउबॉय शॉट' कहा जाता है, वह ऐक्टर को काफ़ी नज़दीक से दिखाता है। ये कैमरा शॉट्स ऐक्टर के घुटनों या जांघ से लेकर सिर तक के हिस्से को कैमरे में कैद करते हैं। इनका इस्तेमाल किरदारों को दमदार और बहादुर दिखाने के लिए किया जाता है (खासतौर पर जब वे हथियार निकालने जैसा कोई ज़रूरी काम कर रहे हों)। ये शॉट्स इतने ज़्यादा इस्तेमाल हुए हैं कि कुछ सिनेमैटोग्राफ़र्स अब इन्हें काउबॉय शॉट्स कहते हैं।

परफ़ेक्ट वाइड शॉट के लिए प्लान करके तैयारी करें।

शूटिंग शुरू करने से पहले, अपनी फ़िल्म के लिए सभी तरह के ज़रूरी कैमरा शॉट्स की एक शॉट लिस्ट बनाएँ। इस लिस्ट में से वाइड शॉट्स की पहचान करें। इसके बाद, स्क्रिप्ट, स्टोरीबोर्ड और डायरेक्टर के विशन को ध्यान में रखते हुए हर शॉट के हिसाब से सही लोकेशन खोजने के लिए लोकेशन स्काउटिंग करें। ध्यान रखें कि शूटिंग की हर जगह पर कुछ खास हालात और मुश्किलें होंगी।

"अगर इनडोर वाइड शॉट प्लान किया जाता है, तो ज़्यादा इक्विपमेंट्स की ज़रूरत होती है," एस्कोबार कहते हैं। "आपको पूरे इलाके को रोशन करने के लिए ज़्यादा लाइट्स की ज़रूरत पड़ेगी और सीन में सभी किरदारों की जगह तय करनी होगी। अगर आप बाहर हैं, तो आप मौसम के भरोसे हैं।"

एक बार जब आपको अपनी लोकेशन मिल जाए, तो तय करें कि आपके ऐक्टर्स कैमरे से कितनी दूर होंगे और सब कुछ फ़ोकस में रखने के लिए सही फ़ोकल लेंग्थ वाला लेंस चुनें। जब आप अपने शॉट को फ़्रेम कर रहे हों, तो ऐसे अहम लैंडमार्क्स खोजें जिनके आसपास आप फ़्रेम को सेट कर सकें। साथ ही, रूल ऑफ़ थर्ड्स का इस्तेमाल करें, ताकि ध्यान खींचने वाली दिलचस्प चीज़ें पूरे फ़्रेम में सही तरीके से नज़र आ सकें।

ढेर सारे आइडियाज़।

शानदार सिनेमैटोग्राफ़ी वाली बेहतरीन फ़िल्म बनाने के लिए आपको फ़िल्म स्कूल जाने की ज़रूरत नहीं है। ऐसे जाने-माने फ़िल्ममेकर्स की फ़िल्में देखकर भी बहुत कुछ सीखा जा सकता है, जिन्हें बेहद खूबसूरत वाइड शॉट्स लेने में महारत हासिल है।

स्टेनली क्यूब्रिक की फ़िल्म द शाइनिंग एक्सट्रीम वाइड-ऐंगल फ़ोटोग्राफ़ी का एक बेहतरीन उदाहरण है, जिसका इस्तेमाल उन्होंने पहाड़ों में अलग-थलग पड़े ओवरलुक होटल के आसपास डर के माहौल को दिखाने के लिए किया है। सैम मेंडेस की ऑस्कर विनर वॉर फ़िल्म 1917 को लगभग एक ही लंबे वाइड शॉट के रूप में शूट किया गया है, जिसमें किरदार दर्शकों के सामने आते-जाते रहते हैं। यह शॉट के कम्पोज़िशन, ब्लॉकिंग और लाइटिंग की अहमियत को दिखाता है। वहीं, सेलीन सियामा की पोर्ट्रेट ऑफ़ अ लेडी ऑन फ़ायर में वाइड फ़्रेम्स का इस्तेमाल, एक चित्रकार के अकेलेपन और अपनी मॉडल के साथ उसके गहरे होते रिश्ते को दिखाता है।

चाहे आपकी फ़िल्म एक बड़े जंगल पर बनी कोई महागाथा हो या एक ही घर में मौजूद किरदारों तक सिमटी हो, अच्छी तरह से तैयार किया गया वाइड शॉट दर्शकों को आपकी फ़िल्म की दुनिया से जोड़ने का एक बेहतरीन तरीका है।

जानें कि कैसे Adobe {{premiere}} आपकी फ़िल्म के हर फ़्रेम को निखारने में मदद कर सकता है।


कन्ट्रीब्यूटर्स

निक एस्कोबार, पैड्रिक ऑमेरा


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