3D रेंडरिंग को समझना.

सामान्य विज्ञापनों से लेकर इमर्सिव वर्चुअल रिएलिटी तक, 3D विज़ुअलाइज़ेशन सब जगह है. आर्किटेक्ट, प्रॉडक्ट डिज़ाइनर, इंडस्ट्रियल डिज़ाइनर और ब्रैंडिंग एजेंसी ऐसी सुंदर और रियलिस्टिक इमेज बनाने के लिए 3D रेंडरिंग का इस्तेमाल करती हैं जो वास्तविक ज़िंदगी जैसी लगती हैं. जानें कि 3D रेंडरिंग क्या है, यह कैसे काम करती है और अपना 3D ऑब्जेक्ट और एनवायरमेंट बनाने के लिए आप कौन-सा Adobe सॉफ़्टवेयर इस्तेमाल कर सकते हैं.

3D रेंडरिंग को समझना

3D रेंडरिंग क्या है?

3D रेंडरिंग, 3D मॉडल से फ़ोटोरियलिस्टिक 2D इमेज बनाने का प्रोसेस है. 3D रेंडरिंग 3D विज़ुअलाइज़ेशन के प्रोसेस का आखिरी चरण है, जिसमें ऑब्जेक्ट के मॉडल बनाना, उन ऑब्जेक्ट का टेक्स्चर बनाना और सीन में लाइटिंग जोड़ना शामिल है. 

 

3D रेंडरिंग सॉफ़्टवेयर 3D मॉडल से जुड़ा सभी डेटा लेता है और उसे 2D इमेज में रेंडर कर देता है. नई टेक्स्चरिंग और लाइटिंग क्षमताओं की बदौलत, 2D इमेज को वास्तविक फ़ोटो से अलग करना मुश्किल हो सकता है या यह स्टाइलिश दिख सकती है— यह कलाकार और विज़ुअलाइज़ेशन के उद्देश्य पर निर्भर करता है. 

3D रेंडरिंग कैसे काम करती है.

हालाँकि “3D रेंडरिंग” और “3D विज़ुअलाइज़ेशन” का इस्तेमाल कभी-कभी एक-दूसरे की जगह पर किया जा सकता है, लेकिन 3D रेंडरिंग वास्तव में 3D विज़ुअलाइज़ेशन प्रोसेस का अंतिम चरण होती है. यहाँ 3D विज़ुअलाइज़ेशन प्रोसेस के बारे में विस्तार से विश्लेषण दिया गया है, यह प्रोसेस 3D रेंडरिंग के साथ खत्म होता है. 

1. 3D मॉडलिंग सॉफ़्टवेयर का इस्तेमाल करके 3D ऑब्जेक्ट या मॉडल बनाएँ.

3D मॉडल या पूरा सीन बनाने के कई तरीके हैं. कुछ स्कल्पटिंग ऐप्लिकेशन आपको पॉलीगॉन (कई भुजाओं वाली आकृति) बनाने और उसे शेप देने, और अंतत: 3D Assets बनाने की सुविधा देते हैं. इस तरह की मॉडलिंग खास तौर से ऑर्गैनिक एसेट बनाने के लिए अनुकूल होती है — जैसे कि पौधे और लोग — क्योंकि यह अनियमित शेप की कलात्मक व्याख्या के अनुकूल होती है.

 

इसके विकल्प भी मौजूद हैं. अन्य मॉडलिंग टूल तीन आयाम वाले स्पेस में पॉलीगॉन बनाने के बजाय किनारे (एज) और सतह बनाने पर फ़ोकस करते हैं. इस तरह से 3D Assets बनाने से गणितीय शुद्धता के साथ एसेट बनाने की सुविधा मिलती है और ऐसे टूल अक्सर इंडस्ट्रियल डिज़ाइन या कंप्यूटर-एडेड डिज़ाइन (CAD) मॉडलिंग में इस्तेमाल किए जाते हैं.

 

या आप किसी स्पेशलाइज़्ड टूल का इस्तेमाल करके असल जिंदगी के किसी मौजूदा ऑब्जेक्ट को “स्कैन” कर सकते हैं — इस तरह के स्कैन से कैप्चर किया गया डेटा आपको 3D स्पेस में ऑब्जेक्ट को रीक्रिएट करने की सुविधा देता है. या आप प्रोसीजरल जेनरेशन के रास्ते पर जा सकते हैं, जिसमें आपका सॉफ़्टवेयर पहले तय किए जा चुके गणितीय नियमों के सेट के आधार पर आपके लिए मॉडल बनाता है.

 

आप अपना 3D मॉडल बनाते हैं और अगला चरण होता है, टेक्स्चरिंग.

2. 3D ऑब्जेक्ट में मटीरियल जोड़ें.

पॉलीगॉन 3D ऑब्जेक्ट का शेप तय करते हैं लेकिन उनमें रंगों या सतह का डीटेल नहीं होता. 3D ऑब्जेक्ट में कलाकार हर पॉलीगॉन के लिए एक टेक्स्चर असाइन कर सकते हैं. टेक्स्चर एक सामान्य मोनोक्रोम रंग में हो सकते हैं या वे चट्टान या लकड़ी जैसे किसी भी नैचुरल मटीरियल से लेकर इंडस्ट्रियल मेटल या प्लास्टिक तक, किसी भी सतह जैसे दिख सकते हैं. 

 

एक अकेला 3D ऑब्जेक्ट अगर करोड़ों नहीं, तो लाखों पॉलीगॉन से मिलकर तो बनता ही है. ऊपरी तौर पर ऑब्जेक्ट, किचन ब्लेंडर के मॉडर्न और इंडस्ट्रियल फ़िनिश वाले लुक या हाथी की खुरदुरी त्वचा की तरह दिख सकता है लेकिन इसकी बुनियादी संरचना में कई पॉलीगॉन और कुछ खाली सतहों से मिलकर बनती है. सही 3D मटीरियल से 3D गहराई वाला भ्रम पैदा कर पाना मुमकिन है. ये टेक्स्चर किसी ऑब्जेक्ट में रंग या रेफ़्लेक्टिविटी जोड़ने से आगे जाकर कहीं ज़्यादा काम करते हैं — ये टेक्स्चर, ऑब्जेक्ट में बहुत बारीकियाँ शामिल कर सकते हैं, जैसे कि किसी कपड़े में टाँके या किसी इंडस्ट्रियल मेटल की सतह के किनारे पर कीलों की पंक्ति.  अगर आपको किसी ऑब्जेक्ट में मैन्युअली ऐसी बारीकियाँ डालनी हों, तो ये बहुत ज़्यादा समय लेती हैं. 

3. 3D एनवायरमेंट में लाइटिंग जोड़ना.

3D ऑब्जेक्ट ऐसे दिखने चाहिए जैसे कि वे वास्तविक दुनिया में मौजूद हों. यह खास तौर से सामान्य यूज़ केस, जैसे कि आर्किटेक्चरल रेंडरिंग और आर्किटेक्चरल विज़ुअलाइज़ेशन के लिए सही है जो कि एक बेसिक फ़्लोर प्लान को अंतिम परिणाम के साफ़ विज़न में बदल सकता है.

 

पॉलीगॉन ऑब्जेक्ट के कलेक्शन को वास्तविक दिखने वाले स्पेस में बदलने के लिए रियलिस्टिक लाइट सोर्स बड़ी भूमिका निभाते हैं. लेकिन 3D आर्टिस्ट आम तौर पर खुद लाइट या शैडो में पेंट नहीं करते. इसके बजाय, 3D सीन में डायरेक्शन सेटिंग, तीव्रता और लाइट सोर्स का टाइप शामिल होता है जो कई ऑब्जेक्ट को प्रकाशित करता है.

लाइट रेंडर करना

Adobe Substance 3D toolset की मदद से बनाए गए टेक्स्चर डिफ़ॉल्ट रूप से फ़िज़िकली बेस्ड रेंडरिंग (PBR) के सिद्धांतों का पालन करते हैं और इसलिए वे हर तरह की लाइटिंग में वास्तविक जैसे दिखते हैं. इसलिए, लकड़ी की एक टेबल तब भी लकड़ी की ही दिखाई देगी, जब उसे धूप वाले टेरेस पर रखा जाए, घर के अंदर रखा जाए या फिर ज़मीन के अंदर कहीं गहरे में रखा जाए.

 

हालाँकि, कुछ सतहें और मटीरियल लाइट को मोड़ देते हैं या लाइट के साथ बहुत अलग तरीके से इंटरैक्ट करते हैं. काँच और बर्फ़ पारभासी (ट्रांसलूसेंट) होते हैं, इसलिए ये लाइट को रिफ़्लेक्ट (परावर्तित) और रिफ़्रैक्ट (अपवर्तित) करते हैं. पानी और अन्य द्रवों की सतह पर लाइट अलग तरह से व्यवहार करती है; और प्रिज़्म पर जब लाइट पड़ती है, तो वह छोटे-छोटे इंद्रधनुष बनाता है. सटीक तरीके से टेक्स्चर किया गया और कलात्मक तरीके से प्रकाशित किया गया सीन बहुत ही असरदार, नाटकीय और बेहतरीन हो सकता है.

4. 3D इमेज रेंडर करना.

3D ऑब्जेक्ट बनाए और टेक्स्चर किए जाने व एनवायरमेंट की लाइटिंग किए जाने के बाद 3D रेंडरिंग प्रोसेस शुरू होता है. यह प्रोसेस कंप्यूटर द्वारा किया जाता है जो कि आपके सीन का आपके तय किए गए पॉइंट ऑफ़ व्यू से एक “स्नैपशॉट” लेता है. परिणाम में आपको अपने 3D सीन का 2D इमेज मिलता है.

 

सॉफ़्टवेयर रेंडरिंग से एक सिंगल इमेज बनाई जा सकती है या रीयल-टाइम मोशन का भ्रम पैदा करने के लिए यह तेज़ गति से लगातार कई इमेज रेंडर कर सकता है.

 

रेंडरिंग कोई यूनिफ़ॉर्म प्रोसेस नहीं है — कई अन्य तरीके भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं, जैसे कि रीयल-टाइम, रे-ट्रेसिंग वगैरह जिनका रेंडरिंग की क्वालिटी पर असर पड़ता है. GPU और CPU क्षमताओं के बारे में ज़्यादा जानने के लिए, Adobe 3D के लिए हार्डवेयर से जुड़ी ज़रूरी शर्तें पेज देखें. 

रेंडर की रेंडरिंग करना