फ़िल्म में सीक्वेंस शॉट्स के लिए गाइड।
सीक्वेंस शॉट्स का इस्तेमाल कैसे करना है, यह जानने के लिए इस गाइड की मदद लें और अपनी फ़िल्ममेकिंग को शानदार बनाएँ।
फ़िल्ममेकिंग, यहाँ तक कि सिर्फ़ व्लॉगिंग भी, सिर्फ़ शानदार शॉट्स को एक साथ जोड़ने से कहीं बढ़कर है। शूटिंग शुरू करने से पहले ही बड़ी प्लानिंग करनी पड़ती है, जिसमें शूटिंग की तकनीकें और एडिटिंग के तरीके शामिल हैं। लेकिन शॉट्स की इतनी सारी किस्मों में से चुनना मुश्किल हो सकता है। इसलिए, पहले से ही सीक्वेंस शॉट्स के बारे में जान लें कि इनका इस्तेमाल क्यों, कैसे, और कब करना है। इससे आपको एक बेहतर फ़िल्म या वीडियो तैयार करने में मदद मिलेगी।
सीक्वेंस शूटिंग क्या होती है?
सीक्वेंस शूटिंग एक ऐसी तकनीक है जिसका इस्तेमाल किसी सीन को अलग-अलग दूरियों से कैप्चर करने के लिए किया जाता है। सीक्वेंस शॉट्स पक्का करते हैं कि एडिटर के पास कहानी सुनाने और दर्शक का ध्यान बनाए रखने के लिए कई तरह के शॉट साइज़ेज़ उपलब्ध हों। आपको कम से कम एक वाइड, एक मीडियम, और एक क्लोज़-अप शॉट ज़रूर लेना चाहिए।
सीक्वेंस शूटिंग को फ़्रेंच में "प्लान सीक्वेंस" भी कहते हैं। इसमें ऊपर दिए गए वाइड (या "मीडियम शॉट"), मीडियम, व क्लोज़-अप शॉट्स सहित कई तरह के कैमरा मूवमेंट्स व फ़्रेम किए गए शॉट्स को ले आउट किया जाता है, ताकि वे आपकी कहानी को सिलसिलेवार ढंग से आगे बढ़ा सकें।
बेहतरीन सीक्वेंस शॉट्स से दर्शक ऐक्शन को अच्छे से समझ पाते हैं, लेकिन दर्शकों का ध्यान बनाए रखने के साथ-साथ, सीक्वेंस शॉट्स यह जानने का कुतूहल भी पैदा करते हैं कि कहानी में आगे क्या होगा। इससे अच्छा और क्या हो सकता है कि खास पलों में दर्शक पॉपकॉर्न की चिंता छोड़ आगे के सीन्स देखने के लिए बेताब रहें।
कुल मिलाकर, सीक्वेंस शूटिंग की वजह से फ़िल्मकार को डिटेल्स की चिंता नहीं करनी पड़ती। जब आपको पहले से पता हो कि आपको क्या शॉट्स इस्तेमाल करने हैं, तो आपको कम्पोज़िशन, लाइटिंग, व इमेजेज़ जैसी चीज़ों पर फ़ोकस करने के लिए ज़्यादा समय मिल जाता है।
सीक्वेंस शूटिंग में इस्तेमाल किए जाने वाले सामान्य शॉट्स।
फ़िल्मों और लंबे वीडियोज़ में, पाँच सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होने वाले कैमरा ऐंगल्स (जिन्हें शॉट फ़्रेमिंग भी कहा जाता है) हैं:
- क्लोज़-अप्स
- वाइड-ऐंगल शॉट्स
- मीडियम शॉट्स
- ओवर द शोल्डर शॉट्स
- पॉइंट ऑफ़ व्यू शॉट्स
आपको सीन का कम से कम एक वाइड, मीडियम, और क्लोज़-अप शॉट ज़रूर लेना चाहिए। ये पहले तीन शॉट्स क्यों? क्योंकि, पुरानी कहावत है, "वाइड बताता है कहाँ, मीडियम बताता है कौन, और टाइट (क्लोज़-अप) बताता है क्या।" इसलिए, अगर एक बेहतरीन कहानी सुनाने की कोशिश की जा रही हो और आपको चाहिए कि दर्शकों की दिलचस्पी कहानी में बनी रहे, तो ये तीन शॉट्स आपको एक शानदार फ़्रेमवर्क देते हैं जिसमें अपने किरदारों या ऐक्शन्स को दिखाया जा सकता है।
फ़ाइव-शॉट प्लान को आज़माएँ।
फ़ाइव-शॉट सबसे लोकप्रिय शॉट सीक्वेंस में से एक है। आइए देखें कि असली शूटिंग में इसे कैसे इस्तेमाल करें। इसके लिए, एक सीन के बारे में सोचें जिसमें एक छोटी सी बच्ची पूरा ध्यान लगाकर ड्रॉइंग कर रही है:
- ड्रॉइंग बनाते हुए उसके हाथों का एक क्लोज़-अप लें।
- ट्रैकिंग शॉट का इस्तेमाल करके उसके चेहरे तक जाएँ। पता चलना चाहिए कि वह बहुत ध्यान लगाकर काम कर रही है।
- लड़की और उसके आस-पास के माहौल को कैद करने के लिए एक मीडियम शॉट लें।
- उसके कंधे के ऊपर से एक पॉइंट-ऑफ़-व्यू शॉट लिया जा सकता है।
- पाँचवाँ शॉट, वाइड ऐंगल होगा। जैसे, बर्ड्स आई व्यू या किसी अन्य क्रिएटिव ऐंगल से।
फ़ाइव-शॉट सीक्वेंस का फ़ायदा क्या है? एक के बाद एक शॉट लेने की इस तकनीक से आपको मुश्किल और शानदार सीन बनाने में मदद मिलती है जो किरदार के राज़ खोलते हैं और कहानी को तेज़ी से आगे ले जाते हैं।
सीक्वेंस शूटिंग में स्टोरीबोर्ड्स कैसे मदद करते हैं।
कोई फ़िल्म या वीडियो बनाते समय स्टोरीबोर्ड, प्रॉडक्शन की प्रॉसेस के लिए एक बेहद ज़रूरी रोडमैप हो सकता है। सीक्वेंस शॉट्स को स्टोरीबोर्ड पर तैयार करके आपको पहले से पता चल जाता है कि आपको कौन से शॉट्स लेने हैं और उन्हें कैसे शूट करना है, ताकि पोस्ट-प्रॉडक्शन एडिटिंग के लिए आपके पास सबसे अच्छी फ़ुटेज मौजूद हो।
आपको एक बेहतरीन प्लान देने के अलावा शॉट-दर-शॉट स्टोरीबोर्ड शूटिंग की गलतियाँ कम करके समय बचाता है। इससे आपको बार-बार शूटिंग और प्लानिंग नहीं करनी पड़ती। साथ ही, दिमाग भी नहीं खपाना पड़ता। खासतौर से, जब स्टोरीबोर्ड पर शॉट सीक्वेंस लगाकर आसानी से देखा जा सकता है कि आपके सीन, शॉट और फ़्रेम में तालमेल कहाँ है और कहाँ नहीं है। इसके अलावा, कैमरापर्सन (अगर वह आप नहीं हैं) के "ऐक्शन" कहने से पहले ही, शॉट्स का क्रम बदला जा सकता है।
चार अलग-अलग सीक्वेंस शॉट लेआउट्स।
ऐक्शन दिखाने से लेकर किरदार का रिएक्शन दिखाने तक, इन अलग-अलग शॉट प्लान्स को सीखें और जानें कि इन्हें अपने अगले प्रॉजेक्ट में सबसे बेहतरीन ढंग से कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है।
मैच ऑन ऐक्शन
इसे कभी-कभी "कटिंग ऑन ऐक्शन" कहा जाता है। इस सीक्वेंस में किरदार के काम को बीच में रोके बिना अलग-अलग ऐंगल से शॉट लिए जाते हैं। हर नया शॉट ठीक वहीं से शुरू होता है जहाँ पुराना शॉट खत्म हुआ था। जब इसे अच्छे से किया जाता है, तो यह सीन बिना रुकावट के चलता रहता है। लेकिन ध्यान रखें कि आसानी से दोहराए जा सकने वाले छोटे ऐक्शन्स, जैसे कि अभिनेता का एक शॉट में धीरे से गिलास से पानी पीना, इस तरह के सीक्वेंस के लिए सबसे अच्छे होते हैं, बजाय इसके कि एक शॉट में धीरे पानी पिया जाए और दूसरे में सारा पानी गटक लिया जाए।
क्लोज़-अप कोलाज
एक सीक्वेंस के बारे में सोचें, जिसमें सिर्फ क्लोज़-अप शॉट्स हैं और यह समय के एक छोटे से हिस्से को दर्शाता है। एक औरत की नीचे की ओर देखती हुई आँखें, फिर किताब का कवर, फिर लाल नाखूनों से पन्ना पलटना, और आखिर में किताब से फटा हुआ पन्ना दिखना। यह सब दर्शक और किरदार दोनों को बेताब कर देता है। ये छोटे-छोटे शॉट्स किरदार की पहेली को सुलझाते हैं। इसके अलावा, जब क्लोज़-अप कोलाज सीक्वेंस को वॉयसओवर के साथ जोड़ा जाता है, तो कहानी में और मज़ा आ जाता है।
द रिवील
रिवील सीक्वेंस शॉट एक सरप्राइज़ पार्टी जैसा होता है। इस सीक्वेंस को इस तरह डिज़ाइन किया जाता है कि आखिरी शॉट में कोई ऐसी बात सामने आए जिसका दर्शक अंदाज़ा भी नहीं लगा सकते थे। इसका मकसद खुशी या डर (अगर हॉरर फ़िल्म बनाई जा रही है) से चौंका देना है। रिवील शॉट्स की कई संभावनाएँ होती हैं - बस पक्का करें कि आप सरप्राइज़ को छिपाएँ और सीक्वेंस के शुरुआती शॉट में कुछ भी ज़ाहिर न करें। कहावत है न कि धमाकेदार ढंग से खत्म करें!
एक्शन/रिएक्शन
एक्शन/रिएक्शन सीक्वेंस शूट में मुख्य वाकये से हटकर तुरंत किरदार का रिएक्शन दिखाया जाता है। यह आमतौर पर एक क्लोज़-अप या मीडियम शॉट होता है, जिसमें किरदार के चेहरे के भाव दिखाई देते हैं, लेकिन दो लोगों या चीज़ों का रिश्ता दिखाने के लिए भी एक्शन/रिएक्शन का इस्तेमाल किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, समुद्र तट की ओर आती एक बड़ी लहर, जिसके बाद धूप सेंकने वालों का आने वाले खतरे को देखते हुए शॉट आता है। एक्शन/रिएक्शन शॉट्स दर्शकों को एक खास तरह के एहसास में ले जाने का काम करते हैं।
सीक्वेंस शॉट्स लेने के लिए कन्टिन्युटी सिस्टम का इस्तेमाल करें।
सीक्वेंस शॉट्स बताते हैं कि क्या शूट करना है, लेकिन इसे कैसे फ़िल्माया जाए यह "कन्टिन्युटी सिस्टम" बताता है। कन्टिन्युटी सिस्टम एक ऐसी तकनीक है जिससे दौर और जगह अलग-अलग सीन्स में अलग-अलग नहीं दिखते। यह एक कैमरा और एडिटिंग तकनीक है जिसे दर्शकों का तजुर्बा बेहतर बनाने के लिए अब लगभग सभी फ़िल्म और टेलीविज़न प्रॉडक्शन इस्तेमाल करते हैं।
जब कंटिन्युटी सिस्टम की तकनीकों के साथ सीक्वेंस शॉट्स शूट किए जाते हैं, तो आपको कैमरा के सामान्य निर्देशों का फ़ायदा मिलता है। इनका मकसद दर्शकों को सहज अनुभव देना है। कंटिन्युटी सिस्टम का लक्ष्य एक ऐसी फ़िल्म पेश करना है जिसकी एडिटिंग इतनी बेहतरीन हो कि दर्शकों को लगे ही न कि एडिटिंग की गई है। आपको यह पसंद नहीं कि उन्हें शॉट्स के बीच अजीब जम्प दिखें या वे जगह की बनावट को लेकर कंफ्यूज़ हों।
इस कैमरा डायरेक्शन सिस्टम का एक हिस्सा है "180-डिग्री रूल"। यह बताता है कि कैमरा को सीन में ऐक्शन और चीज़ों के सिर्फ़ एक तरफ़ रहना चाहिए। न दिखने वाली लाइन, जिसे 180-डिग्री लाइन (या ऐक्शन की धुरी) कहा जाता है, सीन के बीच से होकर निकलती है, ताकि फ़िल्ममेकर बिना किसी रुकावट के कहानी पेश कर सकें। इस तरह, किरदार और चीज़ें अपनी जगह नहीं बदलते। एक शॉट से दूसरे शॉट में, अगर वे दाएँ हैं, तो वे वहीं रहेंगे, और अगर वे बाएँ हैं, तो वे हमेशा बाएँ ही रहेंगे। इसलिए इसे कन्टिन्युटी सिस्टम कहा जाता है।
कन्टिन्युटी सिस्टम के नियमों का पालन करने से आपको कन्टिन्युटी से जुड़ी गलतियों से बचने में मदद मिलती है और आपके एडिटर्स को वह सीक्वेंस शॉट फ़ुटेज मिल जाता है जिससे दर्शक को फ़िल्म बिना किसी रुकावट के "स्मूथ व्यू" में दिखती है।
फ़िल्म बनाने के हुनर को नई ऊँचाइयों पर ले जाएँ।
सीक्वेंस शॉट्स को प्लान करने, डिज़ाइन करने, और फ़िल्माने की सीख हासिल करना भी बेहतर फ़िल्ममेकर बनने के लिए ज़रूरी होता है। हालाँकि अगर आपको डायरेक्शन एडवाइस, एडिटिंग आइडियाज़, व अन्य चीज़ों सहित क्रिएटिविटी के आइडियाज़ देने और वीडियो या फ़िल्म्स बनाने के और भी तरीके जानने हैं, तो इन ज़रूरी टिप्स और ट्रेंड्स को देखें। इसके बाद, Adobe {{premiere}} का इस्तेमाल करना सीखें, ताकि आपकी फ़िल्में और वीडियोज़ बेहतरीन बन सकें।
https://main--cc--adobecom.aem.page/cc-shared/fragments/products/premiere/do-more-with-premiere
Adobe Creative Cloud की मदद से और ज़्यादा काम पूरे करें।
- कुछ ही सेकंड्स में ऑनलाइन YouTube बैनर बनाएँ।
- मुफ़्त में मिनट्स के अंदर YouTube थम्बनेल्स बनाएँ।
- मुफ़्त ऑनलाइन वीडियो मेकर।
- ऑनलाइन आसानी से वीडियोज़ का साइज़ बदलें।
- मुफ़्त में अपने वीडियोज़ ट्रिम करें।
- मुफ़्त ऑनलाइन वीडियो क्रॉपर।