फ़िल्ममेकिंग में हाई ऐंगल शॉट के इस्तेमाल के बारे में जानें।

हाई ऐंगल शॉट्स का क्यों, कब और कैसे इस्तेमाल करना चाहिए, इसके सुझाव पाकर अपनी कहानी में रोमांच भरें।

भले ही आप फ़िल्मकार न हों और आपको बस फ़िल्में देखने का शौक हो, फिर भी आपको पता होगा कि हर फ़िल्म और वीडियो अलग-अलग तरह के शॉट्स से मिलकर बने होते हैं। साथ ही, हर शॉट का अपना मकसद होता है, क्योंकि अलग-अलग तरह से लिए गए शॉट्स दर्शकों पर अलग-अलग तरह से असर डालते हैं। लेकिन कुछ खास ऐंगल्स, जैसे, हाई-ऐंगल शॉट के लिए, सिर्फ़ कैमरे को नीचे की ओर प्वाइंट करके ऐक्शन शूट कर लेना ही काफ़ी नहीं होता। ऐसा करने के पीछे आपके इरादे ज़ाहिर होने चाहिए। हाई-ऐंगल फ़िल्ममेकिंग में “पॉइंट-एंड-शूट” से कहीं ज़्यादा तकनीक और समझ की ज़रूरत होती है।

दर्शकों में किस तरह का भाव जगाने के लिए आपको कैसा कैमरा इक्विपमेंट चाहिए, चलिए इन सब बातों को जानते हुए, हाई-ऐंगल शॉट को समझते हैं: यह क्या होता है, और इसकी मदद से अपनी कहानी को और ज़्यादा ड्रामैटिक (या मज़ेदार) तरीके से कैसे दिखाया जा सकता है।

हाई ऐंगल शॉट क्या होता है?

सरल शब्दों में कहें, तो हाई-ऐंगल शॉट, फ़िल्म बनाने की एक तकनीक है, जिसमें सब्जेक्ट को कैमरा ऊपर से नीचे की तरफ़ देखता है। जब दर्शक किसी व्यक्ति या चीज़ को ऊँचाई से देखते हैं, तो वह छोटी दिखाई देती है, असल में भी और भावनात्मक रूप से भी। इसका दर्शकों पर अलग-अलग तरह का असर पड़ सकता है।

कहानी में किस स्थिति को दिखाया जा रहा है, इसके आधार पर हाई-ऐंगल शॉट्स अलग-अलग भावनाएँ पैदा कर सकते हैं, जैसे कि नाज़ुकता, डर, बेचैनी या खतरा। हाई-ऐंगल शॉट्स कहानी को आगे बढ़ाने, किसी सीन का माहौल बनाने, प्लॉट को सपोर्ट करने और बड़े पैमाने पर कहानी दिखाने में भी मदद करते हैं। उदाहरण के लिए, ये किसी बड़ी भीड़ को दिखा सकते हैं, जैसे कि बेन हर फ़िल्म में रोमन कोलोसियम में मौजूद भीड़ को ऊपर से दिखाने वाला सीन। इसके अलावा, मैड मैक्स जैसी पोस्ट-अपोकलिप्टिक फ़िल्मों में, कँधे के ऊपर से लिया गया हाई-ऐंगल शॉट यह दिखाता है कि किरदार को कितनी दूर तक जाना है, जहाँ आगे सिर्फ़ धूल भरी, वीरान सड़क फैली होती है।

फ़िल्ममेकर हमेशा हाई-ऐंगल शॉट्स को एक ही तरीके से या एक ही तरह के प्रभाव के लिए इस्तेमाल नहीं करते, तो फिर वे तय कैसे करते हैं कि कौन-सा शॉट कब इस्तेमाल करना है? आमतौर पर हाई-ऐंगल शॉट्स तीन तरह की स्थितियों में इस्तेमाल किए जाते हैं:

नैरेटिव हाई ऐंगल: इस शॉट का इस्तेमाल अक्सर युद्ध के सीन में या किसी बड़े, दूर तक फैले सीन को दिखाने के लिए किया जाता है। यह दर्शकों को बहुत सारी विज़ुअल जानकारी देता है। यह किसी जगह का पैमाना दिखा सकता है, सीन का संदर्भ समझा सकता है, और इसे अक्सर कम डेप्थ ऑफ़ फ़ील्ड में शूट किया जाता है। ऑर्शन वेलेस ने सिटिज़न केन में इस तरह के हाई-ऐंगल शॉट का इस्तेमाल किया था, जिससे यह दिखाया जा सके कि अखबार इंडस्ट्री कितनी बड़ी है और एक व्यक्ति उसके सामने कितना बेबस महसूस कर सकता है।

विसरल हाई ऐंगल: आमतौर पर, डायरेक्टर इस तरह के हाई-ऐंगल शॉट का इस्तेमाल दर्शकों को वह महसूस करवाने के लिए करते हैं जो किसी स्थिति में एक किरदार महसूस कर रहा होता है। यह शॉट डर का एहसास पैदा कर सकता है, जैसे कि जब किरदार गिरने से डर रहा हो या किसी किनारे पर खड़ा हो, जैसा कि हिचकॉक की फ़िल्म वर्टिगो में दिखाया गया है। कभी-कभी डायरेक्टर बहुत तेज़ या अजीब ऐंगल से शूट करते हैं, ताकि तनाव का एहसास हो। टाइटैनिक में जेम्स कैमरून ने विसरल हाई-ऐंगल का इस्तेमाल तब किया जब रोज़ जहाज़ पर चढ़ने से पहले ऊपर देखती है। इससे वे यह दिखाने चाहते थे कि रोज़ के जीवन पर उसका कोई नियंत्रण नहीं है और वह सबके फ़ैसलों के सामने बेबस है।

किरदार पर आधारित हाई ऐंगल: अगर आपको किसी किरदार की नाज़ुकता दिखानी है, तो ऐसी परिस्थितियों में किरदार-आधारित हाई-ऐंगल शॉट सबसे अच्छा काम करता है। चाहे नाज़ुकता की वजह किरदार के आसपास का माहौल हो या उसके आसपास मौजूद लोग हों। उदाहरण के लिए, हैरी पॉटर एंड द चैंबर ऑफ़ सीक्रेट्स में क्रिस कोलंबस ने डॉबी को ऊपर से शूट किया, ताकि वे यह दिखा सकें कि यह हाउस-एल्फ़ शारीरिक रूप से कितना छोटा है और लोग यानी मालफ़ॉय परिवार, जिसकी वह सेवा करता है, उसे कितना छोटा समझते हैं।

हाई ऐंगल शॉट्स की लिस्ट बनाएँ।

हाई-ऐंगल शॉट्स लेने के लिए, काफ़ी तैयारी और प्लानिंग की ज़रूरत होती है। इसके लिए सही इक्विपमेंट और कैमरा सेटअप, दोनों का ध्यान रखना पड़ता है। अपने लिए एक शॉट लिस्ट बनाएँ या अगर प्रॉजेक्ट बड़ा है, तो अपने डायरेक्टर ऑफ फ़ोटोग्राफ़ी के लिए लिस्ट बनाएँ। उसमें नीचे दिए गए पॉइंट्स को ज़रूर शामिल करें:

  • इक्विपमेंट: क्या आपको हाई ऐंगल शॉट्स को कैप्चर करने के लिए क्रेन, स्टिक्स और कैमरा ड्रोन का इस्तेमाल करना चाहिए?
  • कैमरा सेटअप: क्या आपको फ़ुल, फ़ोरग्राउंड, या बैकग्राउंड फ़ोकस में शूट करना है? कैमरे की डेप्थ ऑफ़ फ़ील्ड कितनी रखनी है?
  • लोकेशन: क्या आपको लोकेशन पर पहले से मौजूद चीज़ों का इस्तेमाल करना है, जैसे कि किसी इमारत की सीढ़ियों या बालकनी से नीचे देखने वाले शॉट में? पहाड़ी से किसी नीचे मौजूद सब्जेक्ट को शूट करना है?

अपनी शॉट लिस्ट में नोट्स बहुत सटीक रखें, लेकिन यह भी याद रखें कि हाई-ऐंगल शॉट्स हमेशा नैरेटिव, विसरल या किरदार-आधारित नियमों का पालन नहीं करते। कभी-कभी हाई-ऐंगल शॉट का मकसद दर्शकों को जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें उलझन में डालना होता है। यह बात स्टैनली क्यूब्रिक की मशहूर फ़िल्म 2001: अ स्पेस ऑडसी में साफ़ तौर पर दिखाई देती है।

हाई ऐंगल शॉट: प्रोफ़ेशनल्स इसे कैसे शूट करते हैं।

असल में क्यूब्रिक, फ़िल्ममेकिंग के पारंपरिक तरीकों को उलटने के लिए ही जाने जाते थे। उदाहरण के लिए, उन्होंने द शाइनिंग में हाई-ऐंगल शॉट का इस्तेमाल ताकत दिखाने के बजाय उसका उलटा प्रभाव दिखाने के लिए किया था। एक सीन में, जैक डरी हुई वेंडी को धमका रहा होता है और वेंडी पीछे हटते हुए बैट घुमाकर उसे दूर रखने की कोशिश करती है। इस दौरान कैमरा ऐंगल हमारी उम्मीदों के उलट होता है। कैमरा वेंडी को ऊपर से जैक की तरफ़ नीचे देखते हुए दिखाता है, लेकिन जैक उस सीन में आकार में बड़ा और ज़्यादा ताकतवर नज़र आता है। साथ ही, भले ही जैक नीचे से उसे डराने की कोशिश कर रहा हो, क्यूब्रिक का हाई-ऐंगल शॉट वेंडी को शारीरिक रूप से उसके ऊपर यानी मज़बूत स्थिति में दिखाता है, जो फ़िल्म के अंत में उसके फिर से ताकत पाने का संकेत भी देता है। यह शॉट दोहरी भूमिका निभाता है और यह क्यूब्रिक की फ़िल्ममेकिंग प्रतिभा का एक और शानदार उदाहरण है।

हाई-ऐंगल शॉट्स के और उदाहरण देखने हों, तो अल्फ़्रेड हिचकॉक की क्लासिक फ़िल्में ज़रूर देखें। उन्होंने लगभग हर फ़िल्म में इस तकनीक का बेहतरीन इस्तेमाल किया है। साइको में (स्पॉइलर अलर्ट), जब नॉर्मन बेट्स जाँच करने आए व्यक्ति (आर्बोगास्ट) को मारता है, तो हिचकॉक हाई-ऐंगल शॉट का इस्तेमाल करते हैं, ताकि वे आर्बोगास्ट की बेबसी दर्शा सकें। वहीं, द लॉर्ड ऑफ़ रिंग्स ट्राइलॉजी में भी कई जगहों पर बड़े युद्धों को हाई-ऐंगल से दिखाया गया है। यहाँ बड़ी-बड़ी सेनाओं को टकराते हुए देखकर, दर्शक इस संघर्ष के बड़े पैमाने को समझ और महसूस कर पाते हैं।

यह मत सोचिए कि हाई-ऐंगल शॉट्स हमेशा डर, तनाव या खौफ़ दिखाने के लिए ही होते हैं। इन्हें जीत और सफलता दिखाने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है। फ़्रैंक डाराबॉन्ट की शानदार फ़िल्म शॉशैंक रिडम्प्शन में, एंडी ड्यूफ़्रेन को पूरी फ़िल्म में कैदियों, गार्ड्स और वार्डन द्वारा परेशान किया जाता है। लेकिन जब वह आखिरकार जेल से भाग निकलता है, बारिश में खड़ा होकर दोनों हाथ आसमान की ओर उठाता है, तो उस सीन को हाई-ऐंगल शॉट में दिखाया गया है। इस शॉट में एंडी छोटा दिखाई देता है, लेकिन उसी के ज़रिए यह ज़ोर देकर दिखाया गया है कि भले ही दुनिया की नज़र में वह छोटा लगे, फिर भी वह अपनी आज़ादी जीतने के लिए काफ़ी बड़ा है।

अंतिम प्रभाव पर के बारे में सोचें।

कॉमेडी में हाई-ऐंगल शॉट का असर डरावनी फ़िल्मों से बिल्कुल अलग होता है। जैसे, द प्रिंसेस ब्राइड में वेस्ली पहाड़ पर घबराहट में चढ़ रहा होता है और उसका पहला दुश्मन, इनिगो मोंटोया, ऊपर से बोरियत भरी नज़रों से देखते हुए उसका इंतज़ार करता है। इसलिए, यह सीन मज़ाकिया लगता है, डरावना नहीं। सब कुछ संदर्भ पर निर्भर करता है और हाई-ऐंगल शॉट्स को सही समय और सही जगह पर इस्तेमाल करने पर ही उनका असर सबसे बेहतर होता है।

इसलिए, हाई-ऐंगल शॉट्स का इस्तेमाल सोच-समझकर और थोड़ा कम करें, ताकि उनका प्रभाव खत्म न हो। Adobe {{Premiere}} में आसानी से अपने शॉट्स को ट्रिम और अरेंज किया जा सकता है, ताकि हर कैमरा ऐंगल अपना पूरा प्रभाव दिखा सके। आपकी फ़िल्ममेकिंग स्किल्स को बेहतर बनाने वाली ज़्यादा वीडियो एडिटिंग टिप्स पाएँ।

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