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प्रोफ़ाइल शॉट के ज़रिए कहानी को और मज़बूत कैसे बनाएँ।

जानें कि प्रोफ़ाइल शॉट क्या होता है, इसका इस्तेमाल कब करना चाहिए, और कैसे एक सुंदर साइड-व्यू कम्पोज़िशन आपकी कहानी में नई जान डाल सकता है। क्रिएटिव तकनीक और सूझ-बूझ से की गई फ़्रेमिंग के ज़रिए साइड-व्यू कम्पोज़िशन्स दर्शकों के मन पर कही गई बातों से से भी ज़्यादा गहरी छाप छोड़ सकते हैं।

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दमदार प्रोफ़ाइल शॉट।

प्रोफ़ाइल शॉट्स में कैरेक्टर का साइड व्यू दिखाया जाता है, जिससे उसके चेहरे के हाव-भाव उभरकर सामने आते हैं और पूरे सीन में जान भर देते हैं। प्रोफ़ाइल शॉट्स कहानी के कई अनकहे पलों को उजागर करते हैं, जैसे कैरेक्टर द्वारा अंदर से टूटा हुआ महसूस करना या किसी गहरी सोच में खोया होना।

फ़िल्म में प्रोफ़ाइल शॉट क्या होता है?

प्रोफ़ाइल शॉट जिसे साइड प्रोफ़ाइल शॉट या साइड प्रोफ़ाइल व्यू भी कहा जाता है, एक सिनेमैटिक तकनीक है जिसमें सब्जेक्ट को साइड से फ़िल्माया जाता है, ताकि उसकी भावनाएँ, सोच या अकेलापन बेहतर तरीके से नज़र आएँ। इसका इस्तेमाल फ़िल्मों, इंटरव्यूज़, और प्रमोशनल कॉन्टेंट जैसे कई तरह के वीडियोज़ में किया जाता है। बड़े फ़्रेम में दिखाए जाने पर यह सिर्फ़ किरदार नहीं, बल्कि पूरा सीन बयान करता है।

यह शॉट कहानी को दमदार बनाने का एक शानदार तरीका है, जो आपकी अगली फ़िल्म में नीचे दी गई चीज़ों सहित कई कामों में मदद कर सकता है:

  • किरदार के चेहरे के हाव-भाव और बारीक से बारीक फ़ीचर्स दिखाना
  • दर्शकों और किरदार के बीच जुड़ाव बनाना
  • किरदार की दिमागी हालत को उजागर करना
  • सीन के मूड और टोन को सामने लाना
  • छिपी हुई जानकारी उजागर करना

प्रोफ़ाइल शॉट सहित कई तरह के शॉट्स और फ़िल्म के कैमरा ऐंगल्स की अच्छी समझ हो, तो दर्शकों को कहानी से बाँधकर रखा जा सकता है और किरदार के भाव उन्हें भी महसूस कराए जा सकते हैं।

प्रोफ़ाइल शॉट बनाम हेड-ऑन शॉट का इस्तेमाल कब किया जाना चाहिए।

पहली नज़र में ये दोनों शॉट्स एक जैसे लग सकते हैं, लेकिन प्रोफ़ाइल शॉट और हेड-ऑन शॉट फ़िल्म बनाते समय अलग-अलग कामों में इस्तेमाल होते हैं।

प्रोफ़ाइल शॉट में किरदार को साइड से फ़िल्माया जाता है। इसमें किरदार के मन में चल रहे भावों और उसकी निगाह से चीज़ों को दर्शाने पर ध्यान दिया जाता है। यह शॉट आम तौर पर इंटरव्यूज़, फ़िल्म्स, और प्रमोशनल कॉन्टेंट में इस्तेमाल होता है। और ज़्यादा वाइड कम्पोज़िशन्स के साथ इंटीग्रेट करके इसे एक एस्टेब्लिशिंग शॉट के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

दूसरी ओर, हेड ऑन शॉट, जिसे अक्सर आई लेवल शॉट के तौर पर कैप्चर किया जाता है, सब्जेक्ट को सामने से दिखाता है। प्रोफ़ाइल शॉट की तरह, इसका इस्तेमाल भी इंटरव्यू या प्रमोशनल कॉन्टेंट में किया जाता है। हालाँकि, हेड ऑन शॉट का मकसद सब्जेक्ट को सीधे और साफ़ तरीके से दिखाना है, न कि उसके भाव या सीन के मूड को दिखाना। इस शॉट में भावों पर ज़ोर नहीं दिया जाता, इसलिए इसका इस्तेमाल सीधी जानकारी देने के लिए किया जाता है।

आज़माने के लिए प्रोफ़ाइल शॉट के उदाहरण।

प्रोफ़ाइल शॉट्स के कुछ उदाहरण देखें, और फ़िल्ममेकिंग के लिए आइडियाज़ पाएँ।

सीन में दिखाए गए दो कैरेक्टर्स में से किसका वर्चस्व ज़्यादा है यह दिखाने के लिए, उन्हें फ़्रेम के दो अलग सिरों पर रखें, एक पर फ़ोकस करें और दूसरे को हल्का धुँधला रखें। इससे दर्शक आसानी से समझ पाएँगे कि किसकी धाक ज़्यादा है। इस पोज़िशन के ज़रिए दिखाया जाता है कि दोनों किरदारों में से कौन ज़्यादा दबदबे वाला है। ज़्यादा दबदबे वाले किरदार पर फ़ोकस करके यह भी दिखाया जा सकता है कि सीन का अहम किरदार वही है।

भावनात्मक दूरी दिखाने के लिए, दोनों किरदारों को एक ही फ़्रेम में रखते हुए उन्हें अलग-अलग डायरेक्शन में दिखाया जा सकता है। उदाहरण के लिए, दोनों कैरक्टर्स टेबल पर एक-दूसरे के बगल में बैठे हों, लेकिन उनके बीच तनाव दिखाने के लिए, उन्हें एक-दूसरे की ओर नहीं, बल्कि मुँह मोड़े दिखाया जा सकता है। मीडियम शॉट के ज़रिए दोनों कैरेक्टर्स की प्रोफ़ाइल दिखाने के साथ-साथ उनके बीच के भावनात्मक अंतर को भी उजागर किया जा सकता है।

प्रोफ़ाइल शॉट का एक और उदाहरण यह है कि इसका इस्तेमाल किरदार की अंदरूनी सोच को दिखाने के लिए किया जाए। कैरेक्टर को फ़्रेम में रखते हुए उसे आईने में या खिड़की के बाहर देखता हुआ दिखाने से उसकी सोच या अंदरूनी टकराव की झलक मिल सकती है। मीडियम क्लोज़-अप शॉट दर्शकों और किरदार के बीच जुड़ाव बढ़ाने में मदद करता है और दर्शकों को अंदाज़ा हो जाता है कि आने वाले सीन्स भावों से भरपूर हो सकते हैं।

अलग-अलग दूरियों सेऔर अलग-अलग क्रिएटिव चॉइसेज़ से प्रोफ़ाइल शॉट पर कैसे असर पड़ता है।

दर्शक को अपने कैरेक्टर्स के बारे में समझाने में आपके नज़रिए की अहम भूमिका होती है। अपनी क्रिएटिव पसंद के अनुसार कैरेक्टर्स को अलग-अलग रूप में दिखाया जा सकता है। कैमरा कैरेक्टर से कितनी दूरी पर है और किरदार को कहाँ रखा जाए इसके आधार पर दर्शकों में आपकी फ़िल्म के किरदारों को लेकर अलग-अलग विचार और भावनाएँ जगाई जा सकती हैं।

वाइड-प्रोफ़ाइल शॉट एस्टैब्लिशिंग शॉट के रूप में भी काम कर सकता है। यह न केवल दर्शकों को जगह का अहसास कराता है बल्कि यह भी दिखाता है कि किरदार कितना अकेला है या उसके चारों ओर का माहौल कितना भव्य है। दूसरी ओर, क्लोज़-अप प्रोफ़ाइल शॉट किरदार के हाव-भाव को उजागर करते हुए उसकी दिमागी हालत की झलक दिखाता है।

कैमरे के अलग-अलग ऐंगल्स का इस्तेमाल करने के अलावा, अलग-अलग लाइटिंग और फ़्रेम कम्पोज़िशन्स का इस्तेमाल करके भी दर्शकों में खास-खास भाव जगाए जा सकते हैं और मुख्य थीम्स पर ज़ोर दिया जा सकता है। चमकदार रोशनी खुशमिज़ाज माहौल की झलक देती है, वहीं अँधेरी रोशनी रहस्य और डर का अहसास कराती है।

आने वाले सेक्शन में, हम बातचीत करेंगे कि दूरी और अलग-अलग क्रिएटिव कम्पोज़िशन्स आपके दर्शकों पर किस तरह की छाप डालते हैं। खासकर हम आगे दिए गए बिंदुओं पर गहराई से चर्चा करेंगे:

  • दूरी के हिसाब से प्रोफ़ाइल शॉट्स लेना
  • ड्रैमेटिक सिलुएट प्रोफ़ाइल शॉट्स के लिए लाइटिंग
  • कई लोगों के प्रोफ़ाइल शॉट्स
  • माहौल को कैरेक्टर के रूप में इस्तेमाल करना

दूरी के हिसाब से प्रोफ़ाइल शॉट्स लेना।

कितनी दूरी लेकर किरदार को शूट किया जा रहा है, इससे तय होता है कि दर्शकों को उस किरदार के भावों से कितना जुड़ाव महसूस होगा या उसके आसपास का माहौल कितना जाना-पहचाना लगेगा। अलग-अलग दूरियों की अलग-अलग फ़्रेमिंग से आपके प्रोफ़ाइल शॉट में मौजूद भाव और कहानी अलग-अलग अंदाज़ में सामने आ सकते हैं।

प्रोफ़ाइल शूट करते समय, नीचे दिए गए दूरी-आधारित शॉट्स लेने पर गौर करें, ताकि दर्शक आपकी फ़िल्म के कलाकारों से अलग-अलग तरीकों से जुड़ सकें:

  • एक्सट्रीम क्लोज़-अप शॉट में चेहरे के किसी हिस्से, जैसे, आँखें या होंठ को बहुत नज़दीक से दिखाया जाता है, ताकि कैरेक्टर्स की छोटी से छोटी भावनाएँ भी महसूस की जा सकें और उसके साथ गहरा जुड़ाव बनाया जा सके।
  • क्लोज़-अप शॉटमें सब्जेक्ट का सिर और कभी-कभी उसके कंधों को दिखाया जाता है जिससे उसके चेहरे और शरीर के अन्य हावभाव को उभारा जा सके। इससे दर्शक उसके मन में चल रहे भाविन के साथ गहराई से जुड़ पाते हैं।
  • मीडियम क्लोज़-अप शॉट में सिर और ऊपरी धड़ को कैप्चर किया जाता है, जिससे सीन का माहौल भी बना रहता है और दर्शक कैरेक्टर की भावनाओं से नज़दीकी भी महसूस करते हैं। इसे अक्सर तब इस्तेमाल किया जाता है जब कैरेक्टर गहराई से सोच रहा हो या किसी के साथ बातचीत कर रहा हो।
  • वाइड शॉट में किरदार के पूरे शरीर और आसपास के माहौल को कैप्चर किया जाता है। यह न केवल उसके और उसके माहौल के बीच के रिश्ते को दिखाता है, बल्कि शॉट की पोज़िशन के अनुसार उसके अकेलेपन या उसकी असरदार शख्सियत को भी उजागर करता है।

ड्रैमेटिक सिलुएट प्रोफ़ाइल शॉट्स के लिए लाइटिंग।

चाहे शैडोज़ में चीज़ें छिपाकर दर्शकों को सस्पेंस में डालना हो या किसी किरदार की परछाईं को दिखाकर उसका रौब दर्शना हो, असरदार सिलुएट लाइटिंग से भाव और ज़्यादा उभरकर सामने आते हैं।

बैकलाइट्स और शैडोज़ किसी आसान से प्रोफ़ाइल शॉट को दमदार सिलुएट में बादल सकते हैं। इससे किरदार के चेहरे के हावभाव छिप जाते हैं और हल्के बैकग्राउंड में सिर्फ़ उसके बदन की आउटलाइन दिखाई पड़ती है। इससे दर्शकों का ध्यान आउटलाइन और शरीर के हावभाव पर जाता है, किरदार के भावों से एक दूरी पैदा होती है, माहौल में एक किस्म की तनातनी का एहसास होता है, और बोलना मुश्किल हो जाता है कि क्या चीज़ सही है और क्या गलत।

प्रोफ़ाइल सिलुएट का इस्तेमाल आमतौर पर थ्रिलर, फ़िल्म नुआ, और साइकोलॉजिकल ज़ॉनराज़ में किया जाता है, जहाँ लाइटिंग और शैडो ही कहानी बयान करते हुए कभी रहस्य रचते हैं, कभी किरदार के भीतर चल रही कशमकश दिखाते हैं, तो कभी बिना कुछ बोले किरदारों की पहचान छिपाने का काम करते हैं।

मल्टीपर्सन प्रोफ़ाइल शॉट्स।

किसी एक किरदार के साथ नज़दीकी और व्यक्तिगत जुड़ाव बनाने के लिए वन-पर्सन प्रोफ़ाइल शॉट ज़रूरी होता है, लेकिन जब फ़्रेम में कई किरदार बातचीत कर रहे होते हैं, तो सीन में खिंचाव और तनाव पैदा होता है, जो उनके बीच की नाज़ुक भावनाओं और अनकहे रिश्तों को उभार देता है। टू-शॉट दो किरदारों के बीच बातचीत या उनके हल्के-फुल्के हाव-भाव के ज़रिए भावनाएँ व्यक्त करने का बेहतरीन तरीका है। लेकिन जब एक ही फ़्रेम में कई किरदार होते हैं, तो मल्टीपर्सन शॉट उनके बीच की दूरी, निकटता या टकराव के पलों को असरदार ढंग से दिखा सकता है।

एक किरदार को फ़ोरग्राउंड और दूसरे को बैकग्राउंड में दिखाने से उनके बीच भावनात्मक दूरी, बदलते-बिगड़ते हुए रिश्ते, या टकराव का अहसास पैदा किया जा सकता है। फ़्रेम में कैरेक्टर्स की पोज़िशन बताती है कि सीन का मूड क्या है और कैरेक्टर्स के बीच तनाव या जुड़ाव किस दिशा में बदल रहा है।

माहौल को कैरेक्टर के रूप में इस्तेमाल करना।

इंसान या जानवर ही मुख्य फ़ोकस नहीं होते हैं, बल्कि कभी-कभी उनके चारों ओर का माहौल अपनी मौजूदगी से कहानी कह जाता है। कभी-कभी तंग गलियारे या बंजर ज़मीन कहानी के भीतर छिपे बदलाव, आत्मचिंतन और अकेलेपन को शब्दों से ज़्यादा बेहतर रूप में बयान करते हैं।

कभी-कभी एक छोटी-सी जगह ही बता देती है कि किरदार के भीतर कितनी उथल-पुथल चल रही है। इसके उलट, जब किसी किरदार को बड़ी खुली जगह में दिखाया जाता है, तो सीन में आत्मचिंतन, अकेलेपन या असुरक्षा की भावना पैदा हो सकती है। सीन का माहौल दर्शकों की भावनाओं को गहराई से छू सकता है। जब छोटी या बड़ी लोकेशन को किरदार की मानसिक दशा या सीन के टोन से जोड़ा जाता है, तो कहानी और असरदार बन जाती है।

प्रोफ़ाइल शॉट सेट अप करने और फ़िल्माने का तरीका।

सोच-समझकर की गई क्रिएटिव प्लानिंग और सही फ़्रेमिंग तय करती है कि दर्शकों और कैरेक्टर्स के बीच का जुड़ाव कभी न टूटे। प्रोफ़ाइल शॉट को सेट करने और फ़िल्माने के लिए नीचे दिए गए स्टेप्स को फ़ॉलो करें:

  1. स्टाइल तय करें। शूटिंग से पहले, तय करें कि आपको अपने सीन के ज़रिए किन भावों को जगाना है। बेचैनी, तन्हाई, नज़दीकी, या कोई और अहसास। आइडियाज़ पाने के लिए देखें कि इंडस्ट्री के बाकी प्रोफ़ेशनल्स कैसे काम कर रहे हैं।
  2. अपना ऐंगल तय करें। कैमरे को सब्जेक्ट से 90 डिग्री के ऐंगल पर रखें ताकि चेहरा साफ़ दिखाई दे। क्लासिक प्रोफ़ाइल शॉट के लिए कैमरे को सब्जेक्ट की आँखों के लेवल पर रखें या अगर कुछ नया आज़माना चाहें, तो कैमरे की वर्टिकल पोज़िशन में हल्का-सा बदलाव करें लेकिन ऐंगल वही रखें।
  3. पिक्चर को सही ढंग से फ़्रेम करें। रूल ऑफ़ थर्ड्स का इस्तेमाल करके एक बैलेंस्ड कम्पोज़िशन बनाएँ। अपने सब्जेक्ट को किसी एक वर्टिकल लाइन पर रखें और उसकी नज़र के सामने थोड़ी-सी खाली जगह (लुक स्पेस) छोड़ें। सब्जेक्ट के थोड़ा और पास जाएँ या कैमरा ज़ूम करें, ताकि वे फ़्रेम का फ़ोकस बने रहें।
  4. लाइट का सही इस्तेमाल करें। अपने मनचाहे टोन के अनुसार सही लाइटिंग का इस्तेमाल करें। नैचुरल लाइट के लिए टाइमिंग बहुत मायने रखती है। शूट से पहले तय करें कि आपको कितनी डायरेक्ट सनलाइट चाहिए, उसी हिसाब से दिन का वक्त चुनें। आर्टिफ़िशियल लाइटिंग के ज़रिए कई ऑप्शन्स मिलते हैं जिनसे सीन का मनचाहा मूड सेट किया जा सकता है और सब्जेक्ट के फ़ीचर्स पर सही से फ़ोकस लाया जा सकता है।
  5. लाइन को बनाए रखें। डायलॉग सीन शूट करते समय अगर आपको अलग-अलग ऐंगल्स से शूट करना है, तो 180-डिग्री रूल ज़रूर फ़ॉलो करें। मन में सोचें कि दो किरदारों के बीच एक लाइन खिंची हुई है, इस लाइन को पार न करें, ताकि स्क्रीन पर दोनों के बीच की दूरी हर शॉट में एक जैसी बनी रहे।
  6. एक्स्ट्रा कवरेज शूट करें। अगर कैमरा सेटअप पहले से तैयार है, तो कुछ फ़ुल-बॉडी शॉट्स और बिहाइंड-द-सीन्स क्लिप्स भी कैप्चर करें। ये फ़्यूचर कॉन्टेंट या किसी वीडियो प्रॉडक्शन प्रॉजेक्ट में काम आ सकते हैं।

इंटेन्शनल प्रोफ़ाइल शॉट्स फ़िल्माने के लिए सबसे अच्छे तौर-तरीके।

कैमरे को किरदारों के करीब रखने से दर्शकों के लिए किरदारों के मन में चल रहे तमाम जज़्बातों में झाँककर देखना आसान हो जाता है। इस शॉट को गलत ढंग से शूट करने से आपके दर्शक सीन से बाहर हो सकते हैं और सीन दिखने में अनप्रोफ़ेशनल लग सकता है। दिलचस्प, इंटेन्शनल प्रोफ़ाइल शॉट्स लेने के लिए, काम करने के ये तौर-तरीके दिमाग में ज़रूर रखें:

  1. इंटेंट के हिसाब से फ़्रेमिंग करें। प्रोफ़ाइल शॉट एक ऐसे ज़बरदस्त मोड़ के तौर पर काम कर सकता है जिससे दर्शकों को किरदारों के भावों से जुड़ने में मदद मिले। शॉट विज़ुअल तौर पर अच्छा दिखना चाहिए, लेकिन उससे भी ज़्यादा ज़रूरी है कि वह कहानी को आगे बढ़ाए। फिर चाहे टेंशन बढ़ाना हो, किसी को खुद के बारे में सोचते हुए दिखाना हो, या किरदार के भीतर चल रही जद्दोजहद को उजागर करना हो।
  2. सही ऐंगल चुनें। साइड प्रोफ़ाइल ऐंगल को बहुत ज़्यादा या बहुत कम न रखें, ताकि सिलुएट देखने में सपाट न लगे। सब्जेक्ट के फ़ीचर्स उजागर करने के लिए कैमरा लगभग 80 से 90 डिग्री के बीच रखें।
  3. लाइटिंग कंट्रोल करें। हालाँकि सब्जेक्ट पर पड़ने वाले ड्रैमेटिक शैडोज़ थ्रिलर या हॉरर फ़िल्मों में असरदार हो सकते हैं, लेकिन कॉमेडी सीन्स इनका असर उल्टा हो सकता है। अगर ड्रामैटिक या फ़्लैट लाइटिंग आपके सीन के टोन से मैच नहीं करती, तो उसे यूँ ही मत डालें। उदाहरण के लिए, अगर मूडी माहौल बनाना है, तो लो-की लाइटिंग से कैरेक्टर के फ़ीचर्स और इमोशन्स और भी ज़्यादा उभर कर सामने आएँगे।
  4. कट्स के बीच लाइटिंग को एक जैसा बनाए रखें। शॉट्स में लाइटिंग या लुक मैच न होने पर सीन अनप्रोफ़ेशनल लगेगा और दर्शकों को झटका देगा। कन्टिन्युटी बनाए रखने के लिए लाइट मीटर और रेफ़रेंस स्टिल्स का इस्तेमाल करें, खासकर मल्टी-प्रोफ़ाइल शॉट्स वाले सीन में।
  5. पोज़िशनिंग सोच-समझकर करें। सब्जेक्ट को फ़्रेम के बीच से थोड़ा हटाकर रखने से फ़्रेम ज़्यादा दिलचस्प लगेगा। हाँ, अगर किसी आर्टिस्टिक मकसद से सब्जेक्ट को बीच में रखा जा रहा है, वो एक अलग बात है।
  6. व्यस्त बैकग्राउंड्स का इस्तेमाल न करें। भीड़भाड़ भरा माहौल दर्शकों का ध्यान सब्जेक्ट से हटा सकता है। इसलिए सीन में बस उतना ही रखें, जितना कहानी कहने के लिए ज़रूरी हो, ताकि फ़्रेम दिखने में प्रोफ़ेशनल लगे।
  7. मिसअलाइनमेंट से बचें। अगर आई-लाइन्स मैच नहीं करेंगी, तो सीन की लय टूट जाएगी। चाहे कैरेक्टर फ़्रेम के बाहर देख रहा हो या किसी दूसरे किरदार से बातचीत कर रहा हो, उसकी नज़र सीन की जियोग्राफ़ी से मेल खानी चाहिए।
  8. हैंडहेल्ड ट्रैकिंग को स्टेबल रखें। अगर कैमरा हाथ में लेकर सब्जेक्ट को फ़ॉलो किया जा रहा है, तो अपनी दूरी और चाल पर ध्यान दें। कैमरा मूवमेंट स्मूथ और कंट्रोल में होनी चाहिए। अचानक लगने वाले झटके सीन से ध्यान भटका सकते हैं। गिम्बल या रिग कैमरे के मूवमेंट को स्थिर रखते हुए हैंडहेल्ड शूटिंग की नैचुरल फ़ील को कायम रखा जा सकता है।

अपनी फ़िल्म में प्रोफ़ाइल शॉट्स को एडिट करने और बेहतर बनाने के तरीके।

शूटिंग पूरी करने के बाद, Adobe Premiere शॉट्स को परफ़ेक्ट बनाने में मदद कर सकता है। यहाँ कुछ उदाहरण दिए गए हैं जिनमें पोस्ट-प्रॉडक्शन के दौरान प्रोफ़ाइल शॉट्स को नई चमक देने के तरीके बताए गए हैं:

  • एक्सपोज़र, कॉन्ट्रास्ट, और कलर बैलेंस का इस्तेमाल करके लाइटिंग एडजस्ट करें, ताकि फ़ोकस उन अहम डिटेल्स, मूड या टोन पर रहे जिन्हें दर्शाया जाना है।
  • फ़्रेम को क्रॉप और रीपोज़िशन करके शॉट की कम्पोज़िशन को मज़बूत बनाया जा सकता है, ध्यान भटकाने वाली चीज़ों को हटाया जा सकता है, और सब्जेक्ट को रीसेंटर किया जा सकता है।
  • शॉट्स के बीच एक जैसा टोन बनाए रखने और फ़िल्म को सिनेमैटिक लुक देने के लिए हल्की कलर ग्रेडिंग अप्लाई करें

Premiere में वीडियो शॉट्स एडिट करने से आपकी फ़िल्म के सीन में और भी ज़्यादा प्रोफ़ेशनल टच आता है, जिससे दर्शकों पर गहरा असर पड़ता है।

Adobe Premiere की मदद से प्रोफ़ाइल शॉट्स में जान डालें।

प्रोफ़ाइल शॉट्स फ़िल्म के किरदारों और दर्शकों के बीच मज़बूत जुड़ाव बनाने का एक शानदार तरीका हैं। बेहद नाटकीय पलों से लेकर हल्के-फुल्के भावों को दर्शाने वाले हाव-भाव तक, सही फ़्रेमिंग और ध्यान से की गई एडिटिंग सामान्य प्रोफ़ाइल शॉट को भी एक असरदार सिनेमैटिक पल में बदल सकती है। Adobe Premiere आपको मनचाहे शॉट्स बनाने में मदद करता है। कलर ग्रेडिंग, क्रॉपिंग और हर फ़्रेम को प्रोफ़ेशनल लुक देने के लिए इसमें सभी ज़रूरी टूल्स मौजूद हैं। चाहे आपको किसी भी तरह का शॉट एडिट करना हो, Premiere इंडस्ट्री का जाना-माना वीडियो एडिटिंग सॉफ़्टवेयर है, जो आपकी फ़िल्म को नई ऊँचाइयाँ देने में मदद कर सकता है।

प्रोफ़ाइल शॉट के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले सवाल।

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